शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण इलाकों के कुछ प्राइमरी स्कूलों में ऐसी स्थिति बन गई है जहां छात्रों की संख्या और शिक्षकों की तैनाती में पूरी तरह असंतुलन दिखाई दे रहा है।
एकल विद्यालयों में एकल अध्यापकों ने चयनित प्रक्रिया का विरोध किया है अपने वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से,
जबकि बुधवार को मुख्यमंत्री धामी ने 1035 सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं।
यह मामला उत्तराखंड के शिक्षा विभाग की ओर इशारा करता है जहां नियुक्तियों ने विभाग की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। और मुख्यमंत्री को भी अंधेरे में रखा गया है!
जैसा कि हाजा प्राइमरी स्कूल: साइंस में दो टीचर, जबकि पहले से एक हैं!
हाजा प्राइमरी स्कूल में पहले से ही पांच अध्यापक तैनात थे। आज (हाल ही में) साइंस विषय में एक नई नियुक्ति हुई,
जबकि स्कूल में पहले से ही साइंस का एक शिक्षक मौजूद है। अब साइंस में दो टीचर हो गए हैं, जबकि अन्य विषयों या जरूरतों में कमी हो सकती है।
यह नियुक्ति विभाग की ओर से की गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसकी जरूरत पर सवाल हैं।
जगथान स्कूल: यहां छात्रों की संख्या 74 के करीब हैं लेकिन सिर्फ एक से दो अध्यापक हैं !
जगथान प्राइमरी स्कूल में कुल 74 छात्र पढ़ते हैं, लेकिन यहां केवल एक से दो ही अध्यापक तैनात है।
इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक काफी नहीं है, जिससे वहां स्थित शिक्षक मेंटली प्रेशर में रहता है।
जिससे शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों की ओर से यहां अतिरिक्त शिक्षकों की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन नई नियुक्तियां अन्य जगहों पर हो रही हैं।
गमरी प्राइमरी स्कूल: 1 छात्र, 3 अध्यापक!
गमरी प्राइमरी स्कूल में महज एक छात्र है, लेकिन यहां अध्यापक कागज़ों में तीन तैनात हो गए हैं। यह स्थिति बेहद अजीब है,
जहां एक बच्चे के लिए तीन शिक्षक उपलब्ध हैं। इससे विभाग के संसाधनों का गलत इस्तेमाल साफ दिखता है।
कलेथा प्राइमरी स्कूल: पहले 4, अब 5 अध्यापक!
कलेथा स्कूल में पहले चार अध्यापक थे, लेकिन नई नियुक्ति के बाद अब पांच हो गए हैं जबकि लगभग 35 से 50 छात्रों की संख्या होगी।
वहां शिक्षा विभाग ने एकल अध्यापक (सिंगल टीचर) की जानकारी मांग गई थी, लेकिन इसके बजाय अतिरिक्त पद भर दिए गए। यह फैसला भी स्थानीय जरूरतों से मेल नहीं खाता।
शिक्षा विभाग की नीति पर सवाल ?
ये उदाहरण दिखाते हैं कि शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति में पारदर्शिता और जरूरत के आधार पर फैसले नहीं हो रहे।
जहां छात्रों की अधिक संख्या वाले स्कूलों में कमी है, वहीं कम या शून्य छात्रों वाले स्कूलों में अतिरिक्त टीचर तैनात हो रहे हैं। इससे ग्रामीण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
स्थानीय शिक्षाविदों और अभिभावकों की मांग है कि विभाग तुरंत जांच करे और नियुक्तियों को छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR – Pupil Teacher Ratio) के अनुसार संतुलित करे।
शिक्षा मंत्री और जिला शिक्षा अधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप की अपेक्षा है, ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो और सभी बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
क्या यह शिक्षा विभाग का “अजब खेल” है या सिर्फ प्रक्रिया में गड़बड़ी? समय आ गया है कि इस पर गंभीरता से विचार किया जाए।