जिला चिकित्सालय (गांधी शताब्दी नेत्र विज्ञान केन्द्र) में विश्व निमोनिया दिवस के अवसर पर सांस अभियान – ‘‘निमोनिया नहीं तो, बचपन सही’’ का शुभारम्भ किया गया।
निमोनिया उन्मूलन पर केन्द्रित सांस अभियान 12 नवंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक संचालित किया जायेगा।
शुभारम्भ अवसर पर जन्म से लेकर पांच वर्ष आयुवर्ग के बच्चों के माता-पिता तथा अभिभावकों को निमोनिया संक्रमण के लक्षणों, बचाव तथा उपचार की जानकारी उपलब्ध कराई गयी।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मृत्यु दर के कारणों में निमोनिया एक प्रमुख कारण है।
उचित सावधानी और सही जानकारी के द्वारा बच्चों को निमोनिया से बचाना बहुत आसान है।
इस अभियान का उद्देश्य बच्चों में निमोनिया की समय से पहचान करना तथा त्वरित प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना है।
इस हेतु स्वास्थ्य केन्द्रों तथा चिकित्सालयों में आवश्यक दवाओं तथा उपकरणों की व्यवस्था की गयी है। पी.सी.वी. वैक्सीन (न्यूमोकोकल) का सम्पूर्ण टीकाकरण करने के निर्देश दिये गये हैं।
डॉ0 शर्मा ने अभिभावकों से अपील की कि प्रत्येक नवजात बच्चे को छह माह तक सिर्फ मां का दूध ही आहार के रूप में दें,
साथ ही मां का पहला पीला गाढ़ा दूध नवजात शिशु को अवश्य पिलायें, जिससे शिशु के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
छह माह के बाद बच्चे को दूध के साथ-साथ सुपाच्य एवं पोषक आहार दें व बच्चे का समयबद्ध तरीके से सम्पूर्ण टीकाकरण अवश्य करवायें।
जिससे हम निमोनिया उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक हो सकें।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ0 मीता श्रीवास्तव ने कहा कि न्यूमोनिया के लक्षणों की पहचान करना आसान है।
यदि किसी बच्चे में खांसी-जुकाम, तेज बुखार, तीव्रता से सांस लेना, सांस लेते समय पसली चलना जैसे लक्षण दिखायी दें,
तो घरेलू उपचार में समय नष्ट ना करें तथा शीघ्र उपचार हेतु चिकित्सालय ले जायें।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एन.एच.एम. डॉ0 निधि रावत ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मियों तथा आशा कार्यकत्रियों केा सांस अभियान से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया है।
उनके द्वारा अपने अपने क्षेत्रों में जन्म से पांच वर्ष तक के ऐसे बच्चों का चिन्हिकरण किया जा रहा है, जिन्हें निमोनिया से संबंधित लक्षण हों।
कार्यक्रम में गांधी शताब्दी चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ अनिल आर्य, मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य के जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रखर गुप्ता,