उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक बड़े पैमाने पर राजभवन घेराव कार्यक्रम का आयोजन किया,
जिसमें हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। यह प्रदर्शन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भाजपा सरकार की विभिन्न जन-विरोधी नीतियों और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ था।
कार्यक्रम की शुरुआत परेड ग्राउंड, देहरादून से हुई, जहां सुबह 11 बजे से कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्रित हुए।
प्रदेश के विभिन्न कोनों—जैसे हरिद्वार, रुड़की, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर आदि—से बड़ी संख्या में लोग बसों, वाहनों और पैदल मार्च करते हुए पहुंचे।
प्रदर्शन में महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं की खासी भागीदारी देखी गई।
प्रमुख नेता और उनका संदेश
प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रीतम सिंह,
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रभारी शैलजा कुमारी,
सह-प्रभारी गुरदीप सप्पल सहित कई विधायक और वरिष्ठ नेताओं ने इस घेराव को संबोधित किया।
गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पहुंचकर भाजपा की धामी सरकार के ताबूत में अंतिम कील ठोक दी है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा, “इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के माध्यम से हमने भाजपा सरकार की जड़ों को हिलाने का काम किया है।
2027 के विधानसभा चुनाव में इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिलेगा और जनता भाजपा की तानाशाही, जन-विरोधी नीतियों तथा कुशासन से मुक्ति पाएगी।”
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह ने भी कार्यकर्ताओं के उत्साह की सराहना की।
उन्होंने कहा कि परेड ग्राउंड में हजारों की संख्या में एकजुट हुए कार्यकर्ताओं का जोश देखकर स्पष्ट है कि पार्टी संगठन और मजबूत होगा।
आने वाले समय में भाजपा सरकार की जन-विरोधी नीतियों और अलोकतांत्रिक व्यवहार का और कड़ा जवाब दिया जाएगा।
विरोध के प्रमुख मुद्दे
प्रदर्शन मुख्य रूप से इन मुद्दों पर केंद्रित था:
महिला अपराधों में लगातार वृद्धि और महिलाओं की सुरक्षा में लापरवाही।
भ्रष्टाचार का बढ़ता स्तर और सरकारी योजनाओं में घोटाले।
बेरोजगारी की समस्या, खासकर युवाओं में निराशा।
ध्वस्त कानून व्यवस्था, जिसमें हाल के दिनों में हुई कई हत्याएं और अपराध शामिल हैं।
महंगाई का बोझ, जो आम जनता पर भारी पड़ रहा है।
जंगली जानवरों के हमले, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और ग्रामीणों पर खतरा।
मनरेगा जैसी योजनाओं का नाम बदलकर जटिल बनाना और श्रमिकों के हक छीनना।
कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए जैसे “भाजपा हटाओ, उत्तराखंड बचाओ”, “कानून व्यवस्था बहाल करो” और “महंगाई-बेरोजगारी बंद करो”।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ कुछ तनावपूर्ण स्थितियां भी बनीं, लेकिन कुल मिलाकर यह शांतिपूर्ण रहा।
कार्यक्रम का महत्व और भविष्य की योजना
कांग्रेस नेताओं ने इसे “ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जोर दिया कि यह आंदोलन राजभवन से शुरू होकर गांव-गांव तक जाएगा।
पार्टी ने तीन महीने का विस्तृत अभियान चलाने की योजना बनाई है, जिसमें जन-आंदोलनों को संगठित किया जाएगा।
कार्यकर्ताओं के इस बड़े जनसैलाब ने भाजपा सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस का दावा है कि जनता अब बदलाव चाहती है और कुशासन से त्रस्त हो चुकी है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी नेताओं ने कार्यकर्ताओं का हार्दिक धन्यवाद किया और कहा कि यह एकता और उत्साह पार्टी को नई ताकत देगा।
यह घेराव उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना बन गया है, जो आने वाले दिनों में और बड़े आंदोलनों की शुरुआत साबित हो सकता है।