Headlines

Declared:-पंचकेदार के कपाट बंद होने की तिथियां घोषित, 11 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे बाबा केदारनाथ के द्वार

पंचूर वार्ता |धर्म-संस्कृति

रुद्रप्रयाग, 28 अक्टूबर 2026।

उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध पंचकेदार मंदिरों में शीतकालीन कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार,

प्रथम केदार भगवान श्री केदारनाथ के कपाट 11 नवंबर को भाई दूज के अवसर पर सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

वहीं, तृतीय केदार भगवान श्री तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर और भगवान श्री मद्महेश्वर के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे।

कपाट बंद होने के बाद परंपरा के अनुसार भगवान की उत्सव डोलियां निर्धारित पड़ावों से होते हुए,

शीतकालीन गद्दी स्थलों पर पहुंचेंगी, जहां श्रद्धालुओं को शीतकाल में भी पूजा-अर्चना और दर्शन का अवसर मिलेगा।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी ने कपाट बंद होने और उत्सव डोलियों के शीतकालीन प्रवास का कार्यक्रम साझा किया है।

11 नवंबर को बंद होंगे बाबा केदारनाथ के कपाट

भगवान श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट 11 नवंबर को भाई दूज के दिन सुबह 8:30 बजे बंद कर दिए जाएंगे।

इसके बाद बाबा केदारनाथ की चल-विग्रह डोली शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करेगी।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 11 नवंबर को डोली केदारनाथ धाम से रवाना होकर रात्रि विश्राम के लिए रामपुर पहुंचेगी।

12 नवंबर को सुबह रामपुर से प्रस्थान कर फाटा और नारायणकोटी होते हुए डोली रात्रि विश्राम के लिए श्री विश्वनाथ मंदिर, गुप्तकाशी पहुंचेगी।

इसके बाद 13 नवंबर को सुबह 8:30 बजे डोली गुप्तकाशी से प्रस्थान कर अपने शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी।

यहां पूर्व निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान श्री केदारनाथ की चल-विग्रह डोली को विराजमान कराया जाएगा।

शीतकाल के दौरान बाबा केदारनाथ की पूजा-अर्चना ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में संपन्न होगी।

6 नवंबर को बंद होंगे तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट

तृतीय केदार भगवान श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट 6 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

इसके साथ ही भगवान की उत्सव डोली की शीतकालीन गद्दी स्थल श्री मक्कूमठ तक पहुंचने की यात्रा शुरू होगी।

मंदिर समिति के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 6 नवंबर को श्री तुंगनाथ मंदिर से डोली प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए चोपता पहुंचेगी।

7 नवंबर को डोली चोपता से रवाना होकर रात्रि विश्राम के लिए भनकुन गुफा पहुंचेगी।

इसके बाद 8 नवंबर को उत्सव डोली भनकुन गुफा से प्रस्थान कर अपने शीतकालीन गद्दी स्थल श्री मक्कूमठ मंदिर पहुंचेगी।

यहां परंपरा के अनुसार भगवान श्री तुंगनाथ की पूजा-अर्चना की जाएगी। शीतकाल में श्रद्धालु मक्कूमठ स्थित गद्दी स्थल पर भगवान के दर्शन कर सकेंगे।

16 नवंबर को बंद होंगे भगवान मद्महेश्वर के कपाट

द्वितीय केदार भगवान श्री मद्महेश्वर मंदिर के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।

कपाट बंद होने के बाद भगवान की उत्सव डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए पंचकेदार के शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 16 नवंबर को डोली मंदिर से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए प्रथम पड़ाव ग्राम गौंडार पहुंचेगी।

17 नवंबर को गौंडार से रवाना होकर डोली रांसी स्थित राकेश्वरी देवी मंदिर पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम होगा।

18 नवंबर को डोली रांसी से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए ग्राम गिरिया पहुंचेगी।

इसके अगले दिन 19 नवंबर को सुबह डोली गिरिया से रवाना होगी और अपराह्न में श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ स्थित शीतकालीन गद्दी स्थल में प्रवेश करेगी।

इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान श्री मद्महेश्वर के दर्शन कर सकेंगे और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।

शीतकाल में भी जारी रहेंगे दर्शन और पूजा-अर्चना

केदारनाथ, तुंगनाथ और मद्महेश्वर धाम के कपाट बंद होने के बाद भी भगवान की पूजा-अर्चना परंपरागत शीतकालीन गद्दी स्थलों पर जारी रहेगी।

उत्सव डोलियों की यात्रा उत्तराखंड की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और स्थानीय आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शीतकाल में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम की संभावना के चलते मंदिरों के कपाट निर्धारित परंपराओं के अनुसार बंद किए जाते हैं।

इसके बाद भगवान के शीतकालीन प्रवास स्थलों पर श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

पंचूर वार्ता | रुद्रप्रयाग

ये भी पढ़ें:   Wish :-सीएम धामी ने आदिबद्री मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *