युवा आह्वान के तत्वाधान में यू.सी.एफ. सभागार में चल रही उत्तराखंड युवा विधानसभा के दूसरे दिन परिसीमन पर चर्चा हुई।
जिसमें जनसंख्या या भौगोलिक क्षेत्र को आधार बनाया जाये इस बात पर पक्ष और विपक्ष पर विस्तृत चर्चा हुई।
सुबह के सत्र में बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) के अध्यक्ष दुर्गेश पंत ने युवा विधायकों से कहा कि वे नीतियों के निर्माण में विज्ञान और तकनीक को प्राथमिकता दें।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे स्टार्टअप, अनुसंधान और डिजिटल तकनीकों को प्रोत्साहित करें,
ताकि रोजगार के नए अवसर सृजित हों और ग्रामीण क्षेत्रों तक विकास की गति पहुंचे।
विशिष्ट अतिथि अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा हमें लोकतंत्र ने नई परम्परा स्थापित करनी चाहिए।
विरोध के लिए विरोध हमारी संस्कृति नहीं होनी चाहिए।
सांय के सत्र में बतौर मुख्य अतिथि दून विश्वविद्यालय की कुलपति सुरेखा डंगवाल उपस्थित रही।
उन्होंने युवाओं कों जिम्मेदारी, पारदर्शिता और जनसेवा के मूल्यों को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
और अपील की कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और तकनीकी नवाचार जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दें,
तथा समाज के सभी वर्गों के हितों का संतुलित रूप से प्रतिनिधित्व करें। बतौर विशिष्ट अतिथि भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष विपुल मैंदोली ने कहा कि,
राजनीति में युवा शक्ति परिवर्तन और सकारात्मक सोच की प्रतीक है, इसलिए युवा विधायक पारदर्शिता, ईमानदारी और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करें।
परिसीमन पर पक्ष में तर्क देने वाले युवा विधायक अमृषा मेहता ने कहा कि उत्तराखंड की पर्वतीय-मैदानी विविधता को ध्यान में रखते हुए संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।
दूसरे विधायक रिया राणा ने कहा कि लोकतांत्रिक सिद्धांत (समान जनसंख्या) और भौगोलिक वास्तविकता (दुर्गमता) दोनों का समावेश होगा।
एक अन्य विधायक आदित्य फर्शवाण ने कहा कि ने कहा सीमांत व दुर्गम जिलों (जैसे पिथौरागढ़, चमोली) को न्यूनतम सुरक्षित प्रतिनिधित्व है ।
संस्कृति धस्माना ने कहा कि विधायक घनी आबादी वाले मैदानी क्षेत्रों (जैसे देहरादून, हरिद्वार) को जनसंख्या अनुपात के अनुसार सीटें चाहिए ।
विधायक अभिषेक पंत ने कहा कि पलायन और जनसंख्या असंतुलन दोनों समस्याओं का संतुलित समाधान है ।
विधायक मौनिका रावत ने कहा ने आपदा-प्रवण और सीमावर्ती क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों को मान्यता है ।
विधायक पवन पाल ने कहा कि प्रशासनिक कार्यक्षमता और जनसुविधा में सुधार होना चाहिए ।
विधायक लक्ष्यवीर सैनी ने कहा कि क्षेत्रीय असंतोष की संभावना कम है ।
विधायक इस्माइल मलिक ने कहा कि संसाधनों का तुलनात्मक और न्यायसंगत वितरण है ।
विधायक आयुष ध्यानी ने कहा कि दीर्घकालिक स्थिर एवं व्यावहारिक निर्वाचन क्षेत्र संरचना है ।
“विपक्ष के तर्क”
विधायक अभिनव बंसल जनसंख्या और क्षेत्रफल का संतुलन तय करना जटिल व विवादित प्रक्रिया।
दूसरे विधायक शाकुद्दीन ने कहा कि एक व्यक्ति-एक वोट” सिद्धांत आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है।
विधायक विदुषी कापड़ी ने कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप या पक्षपात की आशंका बढ़ेगी।
विधायक सुमित कुमार ने कहा कि परिसीमन मानदंड अस्पष्ट होने से कानूनी विवाद संभव है ।
धीरज चंद्र पाल ने कहा कि विधायक प्रशासनिक गणना व डेटा विश्लेषण जटिल।
विधायक प्रेरणा बिष्ट ने कहा भविष्य में जनसंख्या बदलाव होने पर पुनः असंतुलन है ।
विधायक ऋतम्भरा नैनवाल ने कहा कि कुछ क्षेत्रों को ‘अतिरिक्त लाभ’ मिलने की धारणा।
विधायक प्राची कोठारी ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व अपेक्षा से कम रह सकता है।
विधायक मानसी पोखरियाल ने कहा कि राजनीतिक दलों के लिए सीट पूर्वानुमान कठिन है।
विधायक पंकज तिवारी ने कहा कि नीति निर्माण में संतुलन बनाए रखना व्यावहारिक चुनौती है ।
इसके बावजूद क़ानून व्यवस्था खासकर महिला सुरक्षा पर सदन में खूब हंगामा हुआ।
महिला विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से शून्य काल में इस मुद्दे को उठाने की अनुमति मांगी और इस पर अल्पकालिक चर्चा की माँग की।
स्पीकर ने इसे स्वीकार करते हुए चर्चा करवाई।मंच का संचालन सौरभ ममगाईं एवं कुलदीप सेमवाल ने किया।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य अंदरौली नीरज पंत, राज्य सहकारी बैंक के निवर्तमान निदेशक मनोज पटवाल,
उत्तराखंड महिला मोर्चा उपाध्यक्ष डॉ भावना डोभाल,उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी नरेंद्र जगूड़ी,
युवा आह्वान निदेशक रोहित ध्यानी,युवा आह्वान अध्यक्ष प्रकाश गौड़, उपाध्यक्ष ईश्वर बिष्ट,सचिव लक्ष्मण नेगी,
संकित राणा, कनिका नेगी, संदीप काला, अनुज रावत, कमल मिश्रा, नवीन वर्मा, सोबन नेगी आदि उपस्थित थे।