उद्यान, कृषि, गन्ना एवं राजस्व विभाग के मान्यता प्राप्त संगठनों की समन्वय समिति के आह्वान पर आज डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं फार्मर रजिस्ट्री से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं के समाधान,
डिजिटल क्रॉप सर्वे निजी सर्वेयर से कराए जाने हेतु परेड ग्राउंड, देहरादून से सचिवालय तक एक शांतिपूर्ण एवं अनुशासित कूच किया गया।
इस कूच में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए कार्मिकों ने बड़ी संख्या में प्रतिभाग करते हुए अपनी समस्याओं एवं मांगों को मजबूती से उठाया। कूच पूर्णतः शांतिपूर्ण रहा।
कूच से पूर्व, सचिव कृषि के निर्देश पर निदेशक उद्यान एवं कृषि विभाग द्वारा समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की गई।
वार्ता के दौरान समिति द्वारा जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं को विस्तार से रखा गया,
जिस पर विभागीय अधिकारियों द्वारा गंभीरता से विचार करते हुए जायज़ मांगों के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया गया।
कूच के उपरांत, समन्वय समिति द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह के माध्यम से मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
सिटी मजिस्ट्रेट ने समिति की समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा आश्वस्त किया कि शीघ्र ही राजस्व परिषद के सक्षम स्तर पर समिति के साथियों से वार्ता आयोजित कर समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
इस कूच का संचालन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष अरुण पांडे के मार्गदर्शन में किया गया।
परिषद के पदाधिकारी रविंद्र चौहान, हर्षदेव जोशी एवं पिंकेश रावत की सक्रिय भूमिका रही।
समन्वय समिति के मुख्य संयोजक शुभम आर्य (अधीनस्थ कृषि सेवा संघ, उत्तराखंड) के नेतृत्व में संयोजक अर्जुन सिंह परवाल (तकनीकी कर्मचारी संघ, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग),
विजयपाल मेहता (पर्वतीय पटवारी संघ, उत्तराखंड), सुरेश चंद्र डबराल (उत्तराखंड गन्ना पर्यवेक्षक संघ) एवं दिनेश प्रसाद सेमल्टी (कृषि कर्मचारी संघ, उत्तराखंड)
तथा सहसंयोजक हीरा बल्लभ जोशी, श्याम सिंह, कृष्णपाल चौहान एवं विजय कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अतिरिक्त दिनेश घिल्डियाल (उत्तराखंड लेखपाल संघ) एवं देवेंद्र सिंह असवाल (संरक्षक, कृषि कर्मचारी संघ) सहित विभिन्न घटक संघों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता की।
समन्वय समिति ने आशा व्यक्त की है कि शासन स्तर पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए कार्मिकों की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान किया जाएगा जिस हेतु समिति ने 15 दिन का समय शासन को प्रदान किया ।