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Self-realization:-दून बुक फेस्टिवल के तीसरे दिन आचार्य प्रशांत ने दिया आत्मबोध का संदेश

देहरादून 06 अप्रैल 2026।

दून पुस्तक महोत्सव 2026 के अंतर्गत आज ‘दून लिट फेस्ट’ का आयोजन किया गया,

जिसमें विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक सत्र आयोजित हुए। पहले सत्र में लेखक बृजेश देसाई द्वारा उनकी पुस्तक ‘मोदीज मिशन’ पर चर्चा की गई।

उन्होंने अपने सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन, उनकी शिक्षा और प्रारंभिक जीवन पर विस्तृत चर्चा की।

संवाद सत्र में उन्होंने कहा कि “50 साल बाद जब इतिहास लिखा जाएगा, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सही मूल्यांकन होगा।”

दून लिट फेस्ट के दूसरे सत्र में कुलप्रीत यादव ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के कम चर्चित पहलुओं पर प्रकाश डाला।

कर्नल आर.एस. सिद्धू के साथ संवाद सत्र में उन्होंने रेजांगला युद्ध और भारतीय सेना के शौर्य की गाथा सुनाई।

चर्चा के दौरान उन्होंने राव तुला राम की वीरता की कई अनसुनी कहानियां भी साझा कीं।

मशहूर लेखक और अद्वैत शिक्षक आचार्य प्रशांत ने अपने सत्र ‘Truth Without Apology’ में सत्य, आत्मबोध और जीवन के मौलिक प्रश्नों पर गहरे विचार साझा किए।

उन्होंने आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुख-दुख के संतुलन, रिश्तों की समझ और जीवन जीने की कला पर विस्तृत चर्चा की।

एआई के प्रभाव पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “AI केवल एक साधन है; लोग इसका उपयोग भी उसी तरह करेंगे, जैसे उन्होंने अब तक अन्य संसाधनों का किया है।”

‘चिल्ड्रन्स कॉर्नर’ में बच्चों के कार्यक्रम भारी उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा के साथ संपन्न हुए।

लगभग 700 छात्रों ने कहानीकार सोमाली रावत द्वारा सुनाई गई कोरियाई लोककथा का आनंद लिया,

जिसने उन्हें कल्पना की एक नई दुनिया की सैर कराई। इसके बाद ‘नेस्ट मैन ऑफ इंडिया’

राकेश खत्री ने बच्चों को पक्षियों के लिए घोंसले बनाना सिखाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

वहीं ज्योति जोशी के ‘ऐपण आर्ट वर्कशॉप’ में बच्चों ने उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला के सुंदर रंग उकेरे।

‘कलर मी कॉर्नर’ और ‘आर्ट एंड क्राफ्ट’ जैसी गतिविधियों से भरा यह दिन बच्चों के लिए सीखने और मनोरंजन का एक यादगार अनुभव रहा।

देहरादून साहित्य महोत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘उत्तराखंड के चर्चित कवियों का काव्य पाठ’ सत्र में साहित्य और संवेदनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ अर्चना झा ने सरस्वती वंदना से किया। इसके बाद उन्होंने ‘मिट जाएगा अंधेरा’ गीत तथा सैनिकों को समर्पित एक भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की।

कवयित्री रुचि बहुगुणा उनियाल ने ‘पहाड़ की औरतें’ कविता के माध्यम से पहाड़ी नारी के संघर्ष और साहस को प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि बुद्धिनाथ मिश्र ने अपनी प्रसिद्ध कविताओं ‘पारस पत्थर’ आदि के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस सत्र का संचालन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के हिंदी संपादकीय विभाग के कमलेश पांडे ‘पुष्प’ द्वारा किया गया।

महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में ‘वुमनिया बैंड’ द्वारा सूफी और क्लासिकल फ्यूजन की प्रस्तुति दी गई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दून पुस्तक महोत्सव 2026 के अंतर्गत आगामी दिनों में भी विभिन्न साहित्यिक सत्र, पुस्तक चर्चाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कल के कार्यक्रमों में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली का विशेष सत्र आयोजित होगा।

साथ ही कर्नल आर.एस. सिद्धू और ब्रिगेडियर सुयश शर्मा भी संवाद करेंगे।

शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम में राजस्थान के पारंपरिक मांगणियार लोक कलाकारों की प्रस्तुति के साथ ‘रहनुमा लाइव’ बैंड भी अपनी प्रस्तुति देगा।

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