Headlines

Resignations :- उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफे 

नई दिल्ली 22 जुलाई 2025।  भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया,

जिसने भारतीय राजनीति में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम को जन्म दिया। यह भारतीय इतिहास में पहला मौका है जब किसी उपराष्ट्रपति ने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा।

धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी और विभिन्न नेताओं की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

इस्तीफे की पृष्ठभूमि

जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था।

इससे पहले, वे जुलाई 2019 से जुलाई 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। धनखड़, जो राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव से ताल्लुक रखते हैं, एक अनुभवी वकील, राजनेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य रहे हैं।

उनके इस्तीफे की घोषणा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हुई, जब उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित एक पत्र में संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत अपना त्यागपत्र सौंपा।

इस अनुच्छेद के अनुसार, उपराष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर सहित लिखित पत्र के माध्यम से राष्ट्रपति को इस्तीफा दे सकता है।

इस्तीफे का कारण

धनखड़ ने अपने पत्र में स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे का आधार बताया। उन्होंने लिखा, “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं।”

स्वास्थ्य संबंधी इतिहास: मार्च 2025 में धनखड़ को सीने में दर्द और असहजता की शिकायत के बाद दिल्ली के एम्स में कार्डियक विभाग के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती किया गया था।

उनकी एंजियोप्लास्टी की गई थी, और 12 मार्च को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। उस समय उनकी स्थिति स्थिर बताई गई थी।

संसद सत्र में उपस्थिति: इस्तीफे से पहले धनखड़ ने मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन किया था, और उस दौरान उनकी बीमारी के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखे। इससे उनके अचानक इस्तीफे ने कई सवाल खड़े किए।

धनखड़ का पत्र और भावनात्मक संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित अपने पत्र में धनखड़ ने अपने कार्यकाल के दौरान प्राप्त सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

उनके पत्र के प्रमुख बिंदु:

राष्ट्रपति के प्रति आभार: उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू के सौहार्दपूर्ण सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद: धनखड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और समर्थन को “अमूल्य” बताया और कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में उनसे बहुत कुछ सीखा।

संसद सदस्यों के प्रति कृतज्ञता: उन्होंने संसद के सभी सदस्यों से मिले स्नेह, विश्वास और सम्मान को “जीवनभर की पूंजी” करार दिया।

भारत के प्रति आस्था: धनखड़ ने लिखा, “जब मैं इस प्रतिष्ठित पद को छोड़ रहा हूं, तो मैं भारत के वैश्विक उत्थान और उसकी अद्भुत उपलब्धियों पर गर्व से भर जाता हूं, और उसके उज्ज्वल भविष्य में मेरी पूर्ण आस्था है।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

धनखड़ के इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की प्रतिक्रियाओं और अटकलों को जन्म दिया:

कांग्रेस नेता जयराम रमेश: उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे धनखड़ को मनाएं।

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल: सिब्बल ने धनखड़ के स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं दीं और उनके साथ अपने 30-40 साल के निजी रिश्ते का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं। यह खबर मेरे लिए दुखद है क्योंकि मेरे और उनके बीच बहुत अच्छा संबंध रहा है।”

कुंवर दानिश अली: कांग्रेस नेता ने X पर पोस्ट किया कि धनखड़ का इस्तीफा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को एक “साफ इशारा” है।

उन्होंने अटकलें लगाईं कि क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अगला उपराष्ट्रपति बनाया जाएगा।

सामान्य अटकलें: कुछ X पोस्ट और राजनीतिक विश्लेषकों ने सुझाव दिया कि धनखड़ का इस्तीफा केवल स्वास्थ्य कारणों से नहीं,

बल्कि शीर्ष नेतृत्व के साथ संभावित टकराव का परिणाम हो सकता है। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

धनखड़ का राजनीतिक और पेशेवर सफर

जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में एक जाट किसान परिवार में हुआ था। उनका करियर विविध और प्रभावशाली रहा है:

शिक्षा और वकालत: धनखड़ ने सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ से स्कूली शिक्षा पूरी की और राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से भौतिकी में स्नातक और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की।

1990 में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला।

राजनीतिक करियर:

1989 में जनता दल के टिकट पर झुंझुनू से लोकसभा सांसद चुने गए।

1990-91 में चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री रहे।

1993-98 तक राजस्थान के किशनगढ़ से विधायक रहे।

2019-2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

उपराष्ट्रपति के रूप में: 2022 में उन्होंने उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 346 मतों के अंतर से हराया, जो 1992 के बाद सबसे बड़ा जीत का अंतर था।

इस्तीफे का प्रभाव

राज्यसभा का संचालन: धनखड़ के इस्तीफे से राज्यसभा के सभापति का पद भी खाली हो गया है, जिससे संसद के मानसून सत्र के संचालन पर सवाल उठ रहे हैं।

नए उपराष्ट्रपति का चुनाव: संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर नए चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पद के लिए किसे नामित करती है।

राजनीतिक समीकरण: धनखड़ का इस्तीफा राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में जाट समुदाय के बीच चर्चा का विषय बन सकता है, जहां उनकी नियुक्ति को पहले किसान समुदाय के प्रति भाजपा के समर्थन के रूप में देखा गया था।

जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक घटना है, जिसने स्वास्थ्य कारणों के साथ-साथ कई अटकलों को जन्म दिया है।

उनके कार्यकाल के दौरान भारत के आर्थिक और वैश्विक विकास को देखने का अनुभव उनके लिए गर्व का विषय रहा, जैसा कि उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया।

अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि राष्ट्रपति उनका इस्तीफा कब स्वीकार करती हैं और अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। इस बीच, धनखड़ के स्वास्थ्य के लिए देशभर से शुभकामनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध वेब और X स्रोतों पर आधारित है। कुछ अटकलों और अनौपचारिक दावों को शामिल किया गया है, लेकिन वे आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं हैं।

ये भी पढ़ें:   Opened 🧗 :- उत्तराखंड में पर्वतारोहण को नई उड़ान 83 प्रमुख हिमालयी चोटियां पर्वतारोहियों के लिए खुलीं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *