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Scams :- उत्तराखंड अर्बन कोऑपरेटिव बैंक घोटाला उजागर, RBI ने लगाई 6 महीने की रोक नौ खाताधारक सड़क पर

देहरादून 18 फरवरी 2026।

 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के उत्तराखंड केंद्र ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में हुए बड़े घोटाले का पर्दाफाश करते हुए बैंक के सभी लेन-देन पर छह महीने की रोक लगा दी है।

इस फैसले से बैंक के लगभग 9,000 खाताधारक बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और वे सड़कों पर उतर आए हैं।

खाताधारकों का कहना है कि उनकी जीवन भर की कमाई फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR), चालू खाते और बचत खाते में फंसी हुई है,

जिससे व्यापारियों का कारोबार ठप हो गया है और रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है।

कोई भी लेनदार अपना पैसा नहीं निकाल पा रहा है, जिससे घरों में आर्थिक संकट गहरा गया है।

खाताधारकों के अनुसार, घोटाला 2013-14 से ही संकेत दे रहा था, लेकिन RBI द्वारा हर साल किए जाने वाले ऑडिट और अन्य विभागों के निरीक्षणों के बावजूद यह 12 साल बाद पकड़ में आया।

अब घोटाले की रकम 38 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रभावितों का आरोप है कि यदि RBI ने 2013-14 में ही कार्रवाई की होती,

तो इतना बड़ा घोटाला नहीं होता और हजारों खाताधारकों की मेहनत की कमाई बच जाती।

वे RBI को भी बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत का दोषी ठहरा रहे हैं, क्योंकि समय पर कार्रवाई न करने से घोटाला बढ़ता चला गया।

खाताधारकों की मांग है कि बैंक के सचिव वीरेंद्र एन. सिंह,अध्यक्ष ओम प्रकाश गुप्ता और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ RBI के लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

वे चाहते हैं कि बैंक में एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो सभी खातों की जांच करे और आगे किसी तरह की लीपापोती न होने दे।

साथ ही, मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री से अपील की गई है कि इस मामले में तत्काल जांच शुरू की जाए और खाताधारकों को उनकी जमा राशि वापस दिलाई जाए, ताकि उनकी रोजी-रोटी की समस्या दूर हो सके।

इसके अलावा, खाताधारकों ने NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) खातों की जांच की मांग की है, जहां से रसूखदार लोगों ने बिना गारंटी के ऋण लिए हैं और उन्हें वापस नहीं किया गया है।

वे कहते हैं कि इन ऋणों की वसूली की जाए और दोषी अधिकारियों को जेल भेजा जाए, तभी घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आएगी।

खाताधारकों ने शासन को चेतावनी दी है कि यदि उपरोक्त मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो उन्हें धरना-प्रदर्शन और सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है।

इस अपील पर हस्ताक्षर करने वालों में मुकेश शर्मा (अध्यक्ष, रजिस्टर्ड एसोसिएशन नगर निगम), रजत आगरे, अशोक गौतम, जितेंद्र घोटाला,

एहसान अली, नरेश थापा, अशोक शर्मा, नरेंद्र कटारिया, संतोष कुमार, जितेंद्र सिंह, राजकुमार, भानु प्रकाश, शिव कुमार, महेंद्र रावत,

संजीव वर्मा, ओम प्रकाश आहुजा और अन्य सभी प्रभावित खाताधारक शामिल हैं।

यह मामला सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है,

और प्रभावितों की उम्मीद है कि शासन स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप से न्याय मिलेगा।

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