गुरु की नगरी देहरादून इन दिनों श्रद्धा, आस्था और भक्ति के रंगों में सराबोर रही।
देहरादून की ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक श्री झंडा साहिब मेला उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
रविवार को सुबह 7 बजे से श्री झण्डे जी को उतारने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। इसके बाद संगतों द्वारा दूध, दही, घी, मक्खन,
गंगाजल और पंचगव्य से पवित्र ध्वजदण्ड का स्नान कराया जाएगा। वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अरदास के पश्चात,
इस मेले की एक विशेष परंपरा झंडा साहिब पर गिलाफ चढ़ाने की सेवा है। परंपरा के अनुसार झंडा साहिब पर कुल 40 गिलाफ चढ़ाए जाते हैं।
इनमें सबसे विशेष दर्शनी गिलाफ होता है, जिसे पहले 11 शनील (मखमली) गिलाफ चढ़ाने के बाद झंडा साहिब पर चढ़ाया जाता है।
हर वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु देहरादून पहुंचकर गुरु राम राय दरबार साहिब में माथा टेकते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
इतिहास के अनुसार सन 1675 में कृष्ण पक्ष की पंचमी के दिन गुरु राम राय साहिब ने देहरादून की पवित्र धरती पर कदम रखा था।
उसी परंपरा की स्मृति में हर वर्ष झंडा साहिब मेला आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 8 मार्च 2026 को झंडा साहिब मेले का विधिवत आगाज़ हुआ, जिसके साथ ही पूरे क्षेत्र में आस्था और उत्सव का माहौल देखने को मिला।
इस सेवा को श्रद्धालु अत्यंत पवित्र मानते हैं और इसे करने के लिए कई बार लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।
मेले में खास तौर पर पंजाब से आने वाली संगत भी बड़ी संख्या में शामिल होती है।
हजारों श्रद्धालु एकत्र होकर झंडा साहिब की सेवा में भाग लेते हैं और अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि झंडा साहिब की सेवा करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
कई परिवार पीढ़ियों से इस परंपरा से जुड़े हुए हैं और जब भी उन्हें यह अवसर मिलता है,
वे दूर-दूर से देहरादून पहुंचकर अपने परिवार के साथ झंडा साहिब की सेवा करते हैं।
विशेष रूप से दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की सेवा को अत्यंत सौभाग्य और श्रद्धा का विषय माना जाता है।
झंडा साहिब मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि देहरादून और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है, जो हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज परिसर में देश-विदेश से पहुंच रही संगतों की भारी भीड़ उमड़ रही है और चारों ओर जयकारों, सेवा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज वह पावन स्थल है जहाँ आने वाली संगतों और श्रद्धालुओं की मन्नतें और मुरादें पूरी होती हैं।
वर्ष भर देश-विदेश से श्रद्धालु इस पावन अवसर की प्रतीक्षा करते हैं। इस वर्ष भी लाखों की संख्या में संगतें और श्रद्धालु देहरादून पहुँच चुके हैं।
नगरवासियों द्वारा गुरु की प्यारी संगतों का पूरे सम्मान और आदर-सत्कार के साथ स्वागत किया जा रहा है। गुरु की नगरी देहरादून संगतों के आगमन से निहाल और आनंदित दिखाई दे रही है।
रविवार को सुबह 7 बजे से श्री झण्डे जी को उतारने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। इसके पश्चात दोपहर 2 बजे से 4 बजे के मध्य दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज के सज्जादे गद्दीनशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज की अगुआई में पवित्र श्री झण्डे जी का विधिवत आरोहण किया।
वहीं 10 मार्च को ऐतिहासिक नगर परिक्रमा आयोजित होगी, जिसमें बड़ी संख्या में संगतों की सहभागिता रहेगी।
वहीं श्री झण्डा जी मेले की पूर्व संध्या पर शनिवार को दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज के सज्जादे गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने संगतों को गुरु मंत्र प्रदान किया।
गुरु मंत्र प्राप्त कर संगतें भावविभोर हो उठीं और स्वयं को धन्य-धन्य मानने लगीं। संगतों ने गुरु मंत्र को आत्मसात करते हुए श्री झण्डा साहिब और श्री गुरु राम राय जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने गुरु महिमा का महत्व बताते हुए कहा कि जिस प्रकार सूर्य की किरणें सभी को समान रूप से प्रकाश और ऊष्मा देती हैं, उसी प्रकार आध्यात्मिक गुरु भी अपनी
कृपा और करुणा सभी पर समान रूप से बरसाते हैं। गुरु वह हैं जो हमारे अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
सिखों के सातवें गुरु श्री गुरु हर राय जी के बड़े पुत्र श्री गुरु राम राय जी महाराज का जन्म सन् 1646 ई.में पंजाब के जिला होशियारपुर स्थित कीरतपुर में हुआ था।
बाद में उन्होंने देहरादून को अपनी तपस्थली बनाया। यहाँ श्री दरबार साहिब में लोक-कल्याण के संदेश के साथ एक विशाल ध्वजदण्ड स्थापित कर श्रद्धालुओं को ध्वज के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रेरणा दी।
वहीं श्री झण्डा जी मेले के मेला अधिकारी विजय गुलाटी ने जानकारी देते हुए बताया कि परंपरा के अनुसार शनिवार शाम को पूरब की संगत को पगड़ी,
ताबीज और प्रसाद वितरित कर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और मेले की धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
श्री झण्डे जी पर सुबह 7 बजे से पूजा-अर्चना
रविवार को सुबह 7 बजे से श्री झण्डे जी को उतारने की प्रक्रिया प्रारम्भ होगी। इसके बाद संगतों द्वारा दूध, दही, घी, मक्खन, गंगाजल और पंचगव्य से पवित्र ध्वजदण्ड का स्नान कराया जाएगा। वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अरदास के पश्चात सुबह 10 बजे से श्री झण्डे जी पर गिलाफ चढ़ाने का कार्य शुरू होगा। दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच श्री झण्डे जी का विधिवत आरोहण किया जाएगा, जो मेले का मुख्य आकर्षण होता है और जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में संगतें, श्रद्धालु व दूनवासी उपस्थित रहते हैं।
मेले में आने वाली विशाल भीड़ को ध्यान में रखते हुए श्री झण्डा जी मेला आयोजन समिति द्वारा श्री दरबार साहिब परिसर में पाँच एलईडी स्क्रीनें लगाई गई हैं, जिन पर मेले की सभी प्रमुख धार्मिक गतिविधियों का सीधा प्रसारण किया जाएगा। इसके साथ ही फेसबुक और यूट्यूब के माध्यम से भी मेले का लाइव प्रसारण किया जाएगा। वहीं परिसर में श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा जैविक खेती से तैयार उत्पादों के स्टॉल भी लगाए गए हैं, जो आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की मेडिकल टीम जुटी
मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की डॉक्टरों की टीम मेला स्थल पर तैनात है। परिसर में मेला अस्पताल भी संचालित किया जा रहा है। अस्पताल के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी भूपेन्द्र रतूड़ी ने बताया कि अस्पताल की ओर से श्रद्धालुओं को निःशुल्क दवाइयाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस सेवाएँ 24 घंटे उपलब्ध हैं।
इसके साथ ही श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के ब्लड बैंक और श्री महाकाल सेवा समिति, देहरादून के सहयोग से 06, 07 और 09 मार्च 2026 को तीन दिवसीय स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। अब तक इस शिविर में 150 यूनिट रक्तदान किया जा चुका है और संगतें बढ़-चढ़कर सेवा में भाग ले रही हैं।
गुरु महिमा के रंग में रंगी संगत
शनिवार को दिन भर दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत व पवित्र वातावरण बना रहा। चारों ओर श्री गुरु राम राय जी महाराज और श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज के जयकारे गूंजते रहे। संगतें गुरु महिमा के रंग में रंगी दिखाई दीं। श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के शबद का सिमरन किया और गुरु महिमा का महत्व समझा। ढोल की थाप पर गुरु भजन गाते हुए संगतों ने भक्ति और उल्लास के साथ नृत्य भी किया। पूरा श्री दरबार साहिब परिसर दिन भर धर्म, अध्यात्म, सेवा, भक्ति, उल्लास और उमंग के पवित्र वातावरण से गुंजायमान रहा।