देहरादून 28 अप्रैल 2026।
देहरादून में गांधी पार्क से घण्टाघर तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आयोजित महिला आक्रोश मशाल यात्रा ने प्रदेश में एक नया संदेश दिया।
मंत्री रेखा आर्या सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और महिलाएं शामिल रहीं।
इस विशाल आयोजन में महिला आरक्षण बिल गिरने के विरोध में हजारों की संख्या में माताएं, बहनें और बेटियां शामिल हुईं,
जिसने स्पष्ट कर दिया कि अब नारी शक्ति अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह सजग और मुखर हो चुकी है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह मशाल यात्रा केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं,
बल्कि उन ताकतों के खिलाफ जनाक्रोश है जो महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालने का प्रयास कर रही हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश की नारी अब अपने सम्मान और अधिकारों के लिए एकजुट होकर खड़ी है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को वर्षों तक लंबित रखा गया,
जबकि हाल के प्रयासों ने इसे आगे बढ़ाने का कार्य किया। लेकिन राजनीतिक स्वार्थों के चलते इस दिशा में बाधाएं उत्पन्न की गईं, जिसे जनता भली-भांति देख रही है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए यह संदेश दिया कि कुछ राजनीतिक दल महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं हैं।
और उन्होंने हमेशा इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा बनाकर रखा। उन्होंने यह भी संकेत किया कि,
नई पीढ़ी की महिलाएं अब इन बातों को समझ चुकी हैं और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज की भारतीय नारी केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली शक्ति बन रही है।
केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए किए गए प्रयासों को उन्होंने परिवर्तनकारी बताया,
और यह संकेत दिया कि अब नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी कुछ परंपरागत और परिवारवादी राजनीति करने वाले दलों को असहज कर रही है।
इसी कारण वे महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने से कतराते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह विश्वास भी दिलाया कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति ही प्रदेश और देश के विकास का आधार है।
इस विशाल मशाल यात्रा के माध्यम से एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी उभरा,
कि आने वाले समय में महिला शक्ति अपनी एकजुटता के बल पर उन सभी ताकतों को जवाब देगी जो उनके अधिकारों के मार्ग में बाधा बनती हैं।
अंततः यह आयोजन केवल विरोध नहीं, बल्कि एक संकल्प के रूप में सामने आया एक ऐसा संकल्प, जिसमें नारी शक्ति अपने सम्मान,
अधिकार और भागीदारी के लिए निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि हमारी परंपरा में महिलाओं को सम्मान जरूर मिला है,
लेकिन अब जरूरत है कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी बराबरी का स्थान मिले।
संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी और यह बदलाव देश के विकास को नई दिशा देगा।
मंत्री रेखा आर्या नें कहा कि इस रैली का आयोजन सौभाग्य से मुझे प्राप्त हुआ,
और मेरे आह्वान पर महिला आक्रोश रैली में पहुंची हजारों की संख्या में मातृशक्ति का ह्रदय की गहराईयों से धन्यवाद व आभार व्यक्त करती हूँ।
रेखा आर्या ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विपक्ष का रवैया निराशाजनक रहा है।
महिलाओं की अपेक्षाओं के विपरीत जाकर जो रुख अपनाया गया है, उसे देश की महिलाएं भली-भांति समझ रही हैं।
आने वाले समय में महिलाएं कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित पार्टियों को हराकर मुंहतोड़ जवाब देंगी और इसका प्रभाव भी देखने को मिलेगा।
उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को उनका अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा और नारी सशक्तिकरण को और अधिक मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक सविता कपूर,
आशा नौटियाल सहित विभिन्न जनप्रतिननिधि तथा बड़ी संख्या में प्रदेश भर से आई महिलाएं उपस्थिति रही।
