उत्तराखण्ड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले प्रदेश के हजारों शिक्षकों परेड ग्राउंड पर इकट्ठा होकर अपनी 12 सूत्र मांग को लेकर सचिवालय कूच किया।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE-2009) लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने सहित,
विभिन्न शिक्षक हितों से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।
शिक्षकों का कहना है कि 29 मई 2026 को उच्चतम न्यायालय द्वारा TET से संबंधित दिए गए आदेश के बाद RTE लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सामने गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।
उत्तराखंड में लगभग 20 हजार तथा देशभर में करीब 25 लाख शिक्षक इस मुद्दे से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का तर्क है कि RTE लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षक राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों, योग्यता एवं चयन प्रक्रिया के तहत विधिवत नियुक्त हुए थे।
और उन्होंने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में उन्हें TET की अनिवार्यता से छूट दी जानी चाहिए।
यदि न्यायालय के आदेश का पालन आवश्यक हो तो उनके लिए अनुभव आधारित सरल एवं विशेष परीक्षा आयोजित कर राहत प्रदान की जाए।
प्रमुख मांगें :- RTE-2009 लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए।
प्रदेश के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत DIET एवं SCERT जैसे अकादमिक संस्थानों के पुनर्गठन में प्रारंभिक शिक्षा के शिक्षकों को भी शामिल किया जाए।
औपबंधिक शिक्षकों को उनके लंबे अनुभव के आधार पर TET से छूट अथवा सरल विभागीय परीक्षा के माध्यम से पात्रता प्रदान की जाए तथा वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए।
तीन वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षकों को गृह जनपद, अंतर्जनपदीय, अंतर्मंडलीय एवं पारस्परिक स्थानांतरण की सुविधा दी जाए।
गोल्डन कार्ड योजना की विसंगतियां दूर कर गुणवत्तापूर्ण कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
धारा-23 एवं धारा-27 (घ) के अंतर्गत पात्र शिक्षकों के स्थानांतरण शीघ्र किए जाएं।
शिक्षामित्रों को न्यूनतम ₹35,400 मानदेय एवं महंगाई भत्ते का लाभ दिया जाए।
ऑनलाइन कार्यों के लिए मोबाइल रिचार्ज भत्ता दिया जाए तथा नेटवर्क समस्या के कारण वेतन रोकने जैसी कार्रवाई बंद की जाए।
विद्यालयों के कोटिकरण में मौजूद विसंगतियों का पुनः परीक्षण कर समाधान किया जाए।
स्थानांतरण प्रक्रिया पर न्यायालय में मामला लंबित रहने तक जिला शिक्षा अधिकारियों को शैक्षिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक तैनाती करने के अधिकार दिए जाएं।
प्राथमिक शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाए तथा RTE अधिनियम की धारा-27 में वर्णित कार्यों तक ही उनकी ड्यूटी सीमित रहे।
शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा :-शिक्षक संगठनों का कहना है कि ये मांगें केवल शिक्षकों के हित तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता, स्थायित्व और भविष्य से भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर शिक्षक समुदाय को राहत प्रदान की जाए तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए।
शिक्षकों का मानना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
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