लंबे समय से विवाद और असमंजस का विषय बने लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग को लेकर क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है।
सर्वोच्च न्यायालय की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने मार्ग पर वाहनों के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टता देते हुए लगभग सभी आवश्यक श्रेणी के वाहनों के संचालन की अनुमति दे दी है।
गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में प्रयुक्त “कमर्शियल वाहन” शब्द को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।
अब सीईसी ने इस भ्रम को पूरी तरह समाप्त करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जनहित से जुड़े अधिकांश वाहन इस मार्ग पर संचालित हो सकेंगे।
किन वाहनों को मिली अनुमति
सीईसी के निर्णय के अनुसार लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग पर अब निम्नलिखित वाहनों का संचालन किया जा सकेगा—
सवारी वाहन सरकारी बसें गढ़वाल मोटर ओनर यूनियन (GMOU) की बसें स्कूल बसें
किसानों के ट्रैक्टर
भवन निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहन
इस फैसले से क्षेत्र के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
जनता को मिलेगी बड़ी राहत
लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के बीच संपर्क का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
इस मार्ग पर लंबे समय से विभिन्न प्रकार के वाहनों के संचालन को लेकर संशय बना हुआ था,
जिससे यात्रियों, छात्रों, किसानों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
नए निर्णय के बाद स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों की आवाजाही आसान होगी,
किसानों को अपनी उपज और कृषि कार्यों के लिए राहत मिलेगी तथा निर्माण कार्यों में भी गति आने की संभावना है।
साथ ही सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
सांसद अनिल बलूनी ने जताया आभार
सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि यह निर्णय क्षेत्र की जनता के लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि इस जनहितकारी निर्णय के लिए सर्वोच्च न्यायालय की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी तथा सभी संबंधित अधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।
उन्होंने क्षेत्रवासियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला विद्यार्थियों, किसानों,
व्यापारियों और आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने वाला साबित होगा।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग पर परिवहन व्यवस्था सुचारु होने से गढ़वाल और हरिद्वार क्षेत्र के बीच आवागमन सुगम होगा।
इससे पर्यटन, व्यापार, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। लंबे समय से जिस स्पष्टता का इंतजार किया जा रहा था,
वह अब सीईसी के इस निर्णय के बाद समाप्त हो गया है और मार्ग पर आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों के संचालन का रास्ता साफ हो गया है।