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Question:- राजस्थान के 500 साल पुराने मंदिर में 22.78 करोड़ के कथित चढ़ावा गबन का मामला, अयोध्या और बद्रीनाथ के बाद फिर उठे मंदिर प्रबंधन पर सवाल

जयपुर/नागौर 14 जुलाई 2026।

देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में चढ़ावे और दान की पारदर्शिता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद और उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में दान प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बीच अब,

राजस्थान के नागौर जिले स्थित करीब 500 वर्ष पुराने संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर में 22.78 करोड़ रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है।

जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर संकेत मिलने के बाद मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष समेत 11 सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की गई है।

हालांकि मंदिर समिति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए जांच रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया है।

छह महीने की शिकायतों के बाद बनी जांच समिति,

जानकारी के अनुसार मंदिर प्रबंधन पर पिछले छह माह से लगातार वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे के हिसाब-किताब में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे थे।

इसके बाद नागौर जिला कलक्टर ने एसडीएम के नेतृत्व में 13 सदस्यीय जांच समिति गठित की।

समिति ने विस्तृत जांच के बाद 23 जून को अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी।

रिपोर्ट में क्या सामने आया?

जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार—

वर्ष 2023-24 और 2024-25 में लगभग 15.20 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले।

वर्ष 2025-26 में करीब 7.58 करोड़ रुपये के कथित गबन के संकेत पाए गए।

इस प्रकार कुल 22.78 करोड़ रुपये की अनियमितता का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।

दान में प्राप्त सोना, चांदी और नकद राशि का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला।

कई वित्तीय दस्तावेजों और अभिलेखों में गंभीर विसंगतियां दर्ज की गईं।

समिति ने मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह सहित 11 सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और साक्ष्य नष्ट करने जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की अनुशंसा की है।

मंदिर समिति ने आरोपों को बताया झूठा,

मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने जांच रिपोर्ट को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि एसडीएम ने दुर्भावना से एकतरफा जांच की है।

उनका कहना है कि समिति को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि कानूनी स्तर पर रिपोर्ट को चुनौती दी जाएगी।

राम मंदिर और बद्रीनाथ के बाद बढ़ी चिंता,

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी चढ़ावे और दान प्रबंधन को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठे हैं।

वहीं उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में भी हाल के दिनों में चढ़ावे से जुड़े मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई है।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच प्रारंभ की है और मामले में संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है।

इन लगातार सामने आ रहे मामलों ने देशभर के बड़े धार्मिक संस्थानों में दान और चढ़ावे के पारदर्शी प्रबंधन की आवश्यकता को फिर से प्रमुख मुद्दा बना दिया है।

पारदर्शिता की बढ़ी मांग,

विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों रुपये के दान प्राप्त करने वाले धार्मिक संस्थानों में आधुनिक डिजिटल लेखा प्रणाली,

नियमित स्वतंत्र ऑडिट, सीसीटीवी निगरानी, ऑनलाइन दान रिकॉर्ड और सार्वजनिक वित्तीय रिपोर्ट अनिवार्य की जानी चाहिए।

इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा भविष्य में इस प्रकार के विवादों की संभावना कम होगी।

महत्वपूर्ण: राजस्थान के नागौर मंदिर मामले में जांच समिति ने अनियमितताओं के संकेत देते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है।

अंतिम रूप से किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।

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