उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में बुधवार को बीएएमएस के छात्रों ने लंबित परीक्षा परिणाम और परीक्षाएं आयोजित कराने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब छह छात्र विश्वविद्यालय परिसर में स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए।
घटना के बाद परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 से 2022 बैच के बीएएमएस छात्र विभिन्न निजी आयुर्वेदिक कॉलेजों से विश्वविद्यालय पहुंचे थे।
छात्रों ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू किया।
उनका आरोप था कि लंबे समय से परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किए जा रहे हैं,
और आगे की परीक्षाएं भी आयोजित नहीं हो रही हैं, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है।
प्रदर्शन के दौरान जब छात्रों को परीक्षा नियंत्रक सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं मिले तो उनका आक्रोश बढ़ गया।
नाराज छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए,
हंगामा शुरू कर दिया और कुछ कर्मचारियों को कार्यालयों से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर दिया।
इसी बीच छह छात्र परिसर में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गए। छात्रों को नीचे उतारने के लिए पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों ने काफी प्रयास किए,
लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। टंकी पर चढ़े छात्रों के समर्थन में नीचे मौजूद अन्य छात्र लगातार नारेबाजी करते रहे।
इस दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के प्रयास पर छात्रों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। कुछ समय तक धक्का-मुक्की की स्थिति बनी रही।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि उन्होंने बीएएमएस की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च किए हैं,
लेकिन करीब ढाई वर्ष से उनके परीक्षा परिणाम लंबित पड़े हैं। परिणाम घोषित नहीं होने और परीक्षाएं आयोजित न होने के कारण वे आगे की पढ़ाई,
इंटर्नशिप और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इससे उनका पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि पूर्व में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कई बार समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया,
लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने बताया कि संबंधित निजी कॉलेजों ने इन छात्रों को बिना नीट परीक्षा और बिना काउंसलिंग प्रक्रिया के प्रवेश दिया था।
इस मामले को लेकर न्यायालय में वाद विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद ही परीक्षा परिणाम जारी करने,
अथवा आगे की परीक्षाएं आयोजित करने के संबंध में कोई निर्णय लिया जा सकेगा।
कुलसचिव ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाकर कोई निर्णय नहीं कराया जा सकता और न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण पालन किया जाएगा।