देशभर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 के तहत महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं।
1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए नए नियमों के अनुसार अब पहली बार कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर स्रोत स्तर यानी घरों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से ही उसका पृथक्करण अनिवार्य किया गया है।
नए नियमों का मुख्य उद्देश्य कचरे को एक साथ डंप करने की पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर अधिकतम पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग),
पुन: उपयोग और वैज्ञानिक निस्तारण को बढ़ावा देना है। इसके तहत प्रत्येक नागरिक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि कचरे का सही प्रबंधन अब घर से ही शुरू होगा।
चार श्रेणियों में बांटा गया कचरा
नियमों के अनुसार अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है—
1. गीला कचरा (Wet Waste):
रसोई से निकलने वाले खाद्य पदार्थों के अवशेष, सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन, चायपत्ती और अन्य जैविक कचरा इस श्रेणी में शामिल होंगे।
2. सूखा कचरा (Dry Waste):
कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच, गत्ता, पैकेजिंग सामग्री और अन्य पुनर्चक्रण योग्य वस्तुएं सूखे कचरे में आएंगी।
3. सैनिटरी वेस्ट (Sanitary Waste):
सैनिटरी पैड, डायपर, मेडिकल उपयोग की कुछ डिस्पोजेबल सामग्री और व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े अपशिष्ट इस श्रेणी में रखे जाएंगे।
4. स्पेशल केयर वेस्ट (Special Care Waste):
दवाइयों के अवशेष, बैटरियां, ई-वेस्ट, बल्ब, ट्यूबलाइट, पेंट, रसायन और अन्य ऐसे अपशिष्ट जो पर्यावरण या स्वास्थ्य के लिए संवेदनशील माने जाते हैं, उन्हें स्पेशल केयर वेस्ट के रूप में अलग रखा जाएगा।
घर से ही करना होगा पृथक्करण
डॉ पराग मधुकर धकाते के अनुसार नई व्यवस्था की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार स्रोत पृथक्करण (सोर्स सेग्रीगेशन) है।
इसका अर्थ है कि प्रत्येक परिवार और संस्थान को अपने यहां उत्पन्न होने वाले कचरे को निर्धारित श्रेणियों के अनुसार अलग-अलग रखना होगा।
यदि कचरे को घर से ही अलग नहीं किया गया तो आगे की पूरी प्रबंधन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसलिए नागरिकों से अपेक्षा की गई है कि वे अलग-अलग डस्टबिन का उपयोग करें और कचरे को मिश्रित रूप में न दें।
संग्रह और परिवहन भी होगा अलग-अलग
नई व्यवस्था में केवल कचरे का पृथक्करण ही नहीं, बल्कि उसके संग्रह और परिवहन की प्रणाली में भी बदलाव किया गया है।
नगर निकायों और कचरा संग्रहण एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विभिन्न श्रेणियों के कचरे का अलग-अलग संग्रह और परिवहन सुनिश्चित करें।
इससे गीले कचरे को कम्पोस्ट या बायोगैस उत्पादन के लिए उपयोग किया जा सकेगा, जबकि सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग उद्योग तक पहुंचाया जाएगा।
वहीं सैनिटरी और स्पेशल केयर वेस्ट का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए नियमों का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो,
लैंडफिल साइटों पर जाने वाले कचरे की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही प्लास्टिक,
कागज और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का बेहतर उपयोग संभव होगा।
इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि नगर निकायों पर बढ़ते कचरे के दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी।
गीले कचरे से खाद और ऊर्जा उत्पादन जैसी संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
जनसहभागिता से ही मिलेगी सफलता
अधिकारियों का कहना है कि कचरा प्रबंधन की यह नई व्यवस्था तभी सफल होगी जब आम नागरिक इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं।
घर से कचरे का सही पृथक्करण, निर्धारित श्रेणियों के अनुसार निस्तारण और जागरूकता ही इस अभियान को सफल बना सकती है।
नए नियमों के साथ देश में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है,
जिससे स्वच्छता के साथ-साथ संसाधनों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।