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Conclusion:- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का समापन: नई दिल्ली घोषणा-पत्र पर बनी सहमति, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मिली मजबूती

नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का समापन नई दिल्ली घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से अपनाने के साथ हुआ।

दो दिनों तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में सदस्य देशों ने वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा,

आतंकवाद और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। सम्मेलन का सबसे बड़ा परिणाम यह रहा कि विभिन्न भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सभी सदस्य देश एक साझा घोषणा-पत्र पर सहमत हुए।

पश्चिम एशिया संकट पर संयम की अपील-

सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका टकराव प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे।

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में ब्रिक्स देशों ने क्षेत्र में बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने का आह्वान किया।

सदस्य देशों ने विवादों के समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग का समर्थन किया।

संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग-

ब्रिक्स नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

घोषणा-पत्र में विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूत बनाने की बात कही गई।

भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका को लेकर भी समर्थन व्यक्त किया गया।

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर सहमति-

ब्रिक्स देशों ने आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने,

सीमा-पार भुगतान प्रणालियों को मजबूत करने और डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

इसके साथ ही वैश्विक व्यापार में एकतरफा प्रतिबंधों और शुल्क बाधाओं को लेकर चिंता व्यक्त की गई।

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख-

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा की गई। सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने,

अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण पर रोक लगाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी सहयोग-

सम्मेलन में एआई, डिजिटल अर्थव्यवस्था और नई तकनीकों पर भी विशेष चर्चा हुई।

चीन ने ब्रिक्स एआई ओपन सोर्स ज़ोन और सेवा व्यापार मंच जैसी पहलों का प्रस्ताव रखा, जबकि सदस्य देशों ने तकनीकी सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।

स्वास्थ्य और महामारी प्रबंधन पर जोर-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संक्रामक रोगों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली  स्थापित करने की पहल का उल्लेख किया।

सदस्य देशों ने भविष्य की महामारी चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए नई पहल-

ब्रिक्स देशों ने कृषि क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की।

इनमें कृषि अनुसंधान नेटवर्क, डिजिटल कृषि नेटवर्क, कृषि-पर्यावरण उत्कृष्टता केंद्र और किसानों के अधिकारों से जुड़े वैश्विक मंच की स्थापना शामिल है।

इन पहलों का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि को सुरक्षित बनाना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।

भारत की कूटनीतिक सफलता-

विशेषज्ञों के अनुसार इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, रूस,

भारत और अन्य सदस्य देशों के बीच विभिन्न मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद भारत सर्वसम्मत घोषणा-पत्र तैयार कराने में सफल रहा।

इसे भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।

अगले वर्ष चीन करेगा मेजबानी-

समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन की सफलता पर सभी सदस्य देशों का आभार व्यक्त किया और ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता चीन को सौंपी।

उन्होंने कहा कि नई दिल्ली घोषणा-पत्र ब्रिक्स देशों के साझा दृष्टिकोण को नई दिशा देगा और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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