एमबीबीएस दाखिले के लिए कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े मामले में देहरादून पुलिस ने अब तीसरी एफआईआर दर्ज की है।
30 सितंबर को बसंत विहार थाने में दर्ज मुकदमे में एलिस तोमर को नामजद किया गया है।
आरोप है कि उसने तहसील सदर के तहत स्थायी निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवेदन किया।
राजस्व विभाग की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस अब आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेजों, उनके सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
दो प्रमाणपत्रों के लिए किया था आवेदन
बसंत विहार थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, ललित तोमर निवासी 16 राम विहार, हरिद्वार-कांवली क्षेत्र ने तहसील सदर के तहत दो प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन किया था।
इनमें स्थायी निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र शामिल हैं।
एफआईआर में दोनों आवेदनों के नंबर भी दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक आवेदन के साथ प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच के दौरान उनमें कथित अनियमितता सामने आई।
स्थलीय सत्यापन में बताए पते पर नहीं मिला आवेदक
मामले में दस्तावेजों की जांच के साथ आवेदक के बताए गए पते का स्थलीय सत्यापन भी कराया गया।
एफआईआर के अनुसार, निरीक्षण के दौरान संबंधित पते पर ललित तोमर का निवास नहीं मिला।
इसके बाद आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेजों की सत्यता को लेकर सवाल खड़े हुए।
राजस्व विभाग की जांच और तहरीर के आधार पर पुलिस ने अब मुकदमा दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
BNS की चार धाराओं में मुकदमा
राजस्व विभाग की तहरीर मिलने के बाद बसंत विहार थाना पुलिस ने ललित तोमर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की चार धाराओं में मामला दर्ज किया है।
जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेज कहां से तैयार हुए,
उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
पहले रायपुर और क्लेमेंट टाउन में दर्ज हो चुके हैं मुकदमे
एमबीबीएस दाखिले से जुड़े फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण में इससे पहले थाना रायपुर और थाना क्लेमेंट टाउन में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
रायपुर थाने में दर्ज मुकदमे में खुशी, परी और स्वाति नामजद हैं, जबकि क्लेमेंट टाउन थाने में दर्ज मामले में तृप्ति और उनकी मां उमा देवी को आरोपी बनाया गया है।
अब बसंत विहार थाने में ललित तोमर के खिलाफ दर्ज तीसरी एफआईआर के बाद तीनों मुकदमों में कुल छह नामजद आरोपी हो गए हैं।
फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच से सामने आया मामला
मामले की शुरुआत एमबीबीएस दाखिले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों की जांच से हुई।
प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए थे।
इसके बाद जिलाधिकारी स्तर से प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया।
जांच में दस्तावेजों में कथित गड़बड़ियां सामने आने के बाद संबंधित प्रमाणपत्रों और उनके आधार पर किए गए दाखिलों की पड़ताल शुरू हुई।
जांच आगे बढ़ने के साथ अलग-अलग प्रमाणपत्रों और उन्हें हासिल करने के लिए किए गए आवेदनों को लेकर पुलिस कार्रवाई का दायरा भी बढ़ता गया।
दोनों पुराने मुकदमों में 12 गिरफ्तारियां
रायपुर और क्लेमेंट टाउन थानों में दर्ज मामलों की जांच एसआईटी कर रही है। पुलिस के अनुसार,
इन मामलों में फर्जीवाड़े से जुड़े अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
तीसरी एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
अब जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने और उनके इस्तेमाल का नेटवर्क कितना व्यापक है।
प्रमाणपत्रों से लेकर एमबीबीएस काउंसलिंग रिकॉर्ड तक जांच
जांच के दौरान अलग-अलग तहसीलों से जारी प्रमाणपत्रों, आवेदनों के साथ लगाए गए दस्तावेजों और एमबीबीएस काउंसलिंग के दौरान जमा किए गए रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।
पुलिस और एसआईटी यह भी जांच करेगी कि संबंधित प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल दाखिले के लिए किस स्तर तक किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
तीसरी एफआईआर सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने मुख्य सवाल कथित फर्जी प्रमाणपत्रों की पूरी कड़ी और उनसे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का है।
पुलिस की जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।