उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्री-एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में,
सोमवार को विभिन्न सामाजिक, महिला, छात्र और जन संगठनों ने नागरिक मार्च निकाला।
उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के नेतृत्व में आयोजित यह मार्च गांधी पार्क से सचिवालय स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ा।
हालांकि, सचिवालय के निकट पुलिस ने मार्च को रोक दिया और आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया।
आयोजकों के अनुसार, इस कार्रवाई के कारण प्रदर्शनकारी अपना ज्ञापन अधिकारियों को नहीं सौंप सके।
सचिवालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका
मार्च में अग्रगामी छात्र नौजवान सभा, स्त्री मुक्ति लीग संगठन, BGVS, जनवादी महिला संगठन, जन संवाद,
AIDSO, SFI, महिला एकता केंद्र, इप्टा सहित कई जन संगठनों के प्रतिनिधियों और नागरिकों ने भाग लिया। विभिन्न चुनावी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मार्च में शामिल हुए।
आयोजकों के मुताबिक, सचिवालय के पास तैनात पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की होने का आरोप लगाया गया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बसों तक पहुंचाकर हिरासत में ले लिया।
हिरासत में लिए गए लोगों में कमला पंत, निर्मला बिष्ट, डॉ. रवि चोपड़ा, प्रो. राघवेंद्र नयशीधम, त्रिलोचन भट्ट,
जयकृत कंडवाल, कुलदीप और इरा चौहान सहित अन्य आंदोलनकारी शामिल बताए गए।
एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की उठाई मांग
प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 2026 की एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई मतदाता सूची को आधार बनाकर मताधिकार की रक्षा करने की मांग उठाई।
उनका कहना था कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न हो।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्री-एसआईआर और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उत्तराखंड में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
उन्होंने नाम हटाने की प्रक्रिया, सत्यापन के तरीकों और प्रभावित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने को लेकर सवाल उठाए।
17.05 लाख नाम हटाए जाने का दावा
प्रस्तावित ज्ञापन में संगठनों ने दावा किया कि उत्तराखंड में प्री-एसआईआर
और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लगभग 17.05 लाख नाम हटाए गए, जबकि करीब 4.01 लाख नाम जोड़े गए।
संगठनों ने इन आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि अनुपस्थिति, स्थान परिवर्तन की आशंका अथवा सत्यापन में कठिनाई मात्र के आधार पर उचित जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
हालांकि, नाम हटाए जाने और जोड़े जाने से संबंधित इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि तथा इनके पीछे के कारणों का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
ज्ञापन में रखी गईं ये प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से तैयार किए गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:
वर्ष 2026 की एसआईआर प्रक्रिया को रद्द किया जाए।
प्री-एसआईआर के दौरान हटाए गए नामों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़े जाएं।
नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाताओं को सूचना देने और अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।
सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में बूथ स्तर पर शिकायत निवारण शिविर लगाए जाएं।
मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
मतदाताओं की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाया जाए।
संगठनों ने मुख्यमंत्री और मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड को ज्ञापन भेजकर मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की थी।
हालांकि, मार्च के दौरान पुलिस द्वारा रोके जाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के कारण ज्ञापन सौंपे जाने की कार्रवाई नहीं हो सकी।
मताधिकार की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखने की बात
आंदोलनकारियों ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है,
और मतदाता सूची में नाम दर्ज होना इस अधिकार के इस्तेमाल की पहली शर्त है।
इसलिए मतदाता सूची में किसी भी तरह के संशोधन के दौरान पात्र नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल जन संगठनों ने हटाए गए नामों की बहाली, एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा और निर्वाचन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
महत्वपूर्ण बात: यह खबर आयोजकों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी और उनके आरोपों पर आधारित है।
नाम हटाए जाने के आंकड़ों, पुलिस कार्रवाई और ज्ञापन सौंपने की स्थिति पर संबंधित निर्वाचन अधिकारियों एवं पुलिस का पक्ष मिलने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।