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Announcement:- दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से हटाने की मांग पर कांग्रेस की विशाल रैली, आंदोलन तेज करने का ऐलान

 पंचूर वार्ता | राजनीति

देहरादून 16 अक्टूबर 2026।

उत्तराखंड की राजनीति में अंकिता भंडारी हत्याकांड और भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने का मुद्दा लगातार तूल पकड़ रहा है।

इस मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश में अपना विरोध तेज कर दिया है।

शुक्रवार को देहरादून में कांग्रेस ने विशाल रैली निकालकर भाजपा के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से हटाने की मांग पूरी होने तक पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा।

कांग्रेस की यह रैली देहरादून के शिमला बाईपास क्षेत्र से शुरू हुई और बल्लूपुर होते हुए घंटाघर पहुंची।

यहां उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेता स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रैली का समापन किया गया।

रैली में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा,एआईसीसी सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत,

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक प्रीतम सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष करन महारा, पूर्व मंत्री डॉ हरक सिंह रावत, महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला,

वीरेंद्र पोखरियाल,राजीव महर्षि, डॉ प्रतिमा सिंह, गोदावरी थपली सहित प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर भाजपा पर कांग्रेस का हमला

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार और भाजपा से सवाल पूछ रही है।

पार्टी का आरोप है कि इस प्रकरण से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।

कांग्रेस ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

पार्टी का कहना है कि अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच उन्हें संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाना उचित नहीं है।

कांग्रेस ने इस मामले में उनकी नियुक्ति को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए उन्हें राज्यपाल पद से हटाने की मांग की है।

हालांकि, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति और अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के बीच संबंध को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाई जा रही आशंकाओं को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

किसी व्यक्ति की संलिप्तता या जांच प्रभावित करने की बात को स्थापित तथ्य मानने के लिए संबंधित जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष आवश्यक हैं।

दिल्ली में अंकिता के माता-पिता के विरोध के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा दिल्ली में विरोध दर्ज कराने और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उनके समर्थन में पहुंचने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

उत्तराखंड कांग्रेस ने भी इस घटनाक्रम के बाद अपने आंदोलन को और तेज करने का रुख अपनाया है।

कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा, न्याय और जवाबदेही से जुड़ा सवाल है।

पार्टी नेताओं ने इस प्रकरण को लेकर प्रदेशभर में जनसमर्थन जुटाने और सरकार पर दबाव बनाए रखने की बात कही है।

2027 से पहले भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है मुद्दा

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस का लगातार प्रदर्शन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस इस मुद्दे के माध्यम से महिला सुरक्षा, न्याय और सरकार की जवाबदेही जैसे सवालों को प्रमुखता से उठा रही है।

शुक्रवार को देहरादून में निकली विशाल रैली इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

शिमला बाईपास से घंटाघर तक निकली रैली के जरिए कांग्रेस ने राजधानी में अपनी राजनीतिक सक्रियता प्रदर्शित की और दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से हटाने की मांग दोहराई।

कांग्रेस ने संकेत दिया है कि जब तक उसकी मांग पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस अपने विरोध को किन नए रूपों में आगे बढ़ाती है और भाजपा इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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