शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है।
आज रविवार, 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होने के साथ ही मां दुर्गा की आठवीं शक्ति मां महागौरी की पूजा-अर्चना का विशेष धार्मिक महत्व रहेगा।
नवरात्रि की अष्टमी को दुर्गाष्टमी या महाष्टमी के रूप में भी जाना जाता है।
इस अवसर पर श्रद्धालु मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे।
मां महागौरी की पूजा से मिलती है सुख-समृद्धि की कामना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी मां दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं। उनका स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और उज्ज्वल है।
मां महागौरी को शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि,
सच्चे मन से मां की आराधना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
नवरात्रि की अष्टमी पर मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु मां को पुष्प, फल, मिठाई और चुनरी अर्पित कर आशीर्वाद मांगते हैं।
इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ और मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
अष्टमी पर कन्या पूजन की परंपरा
नवरात्रि की अष्टमी पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। इस दिन छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है।
श्रद्धालु कन्याओं के पैर धोकर उन्हें तिलक लगाते हैं और भोजन कराकर दक्षिणा एवं उपहार भेंट करते हैं।
कई परिवारों में अष्टमी के दिन हवन के साथ नवरात्रि के अनुष्ठानों का समापन भी किया जाता है।
हालांकि, कुछ श्रद्धालु नवमी तिथि पर कन्या पूजन और हवन करते हैं।
ऐसे में पूजा का समय स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित किया जाता है।
मां दुर्गा की आराधना से भक्तिमय हुआ वातावरण
शारदीय नवरात्रि के अवसर पर देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है।
घरों में भी सुबह से पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है।
भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक विचारों का संचार होता है।