उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में लगातार हो रही हत्याओं और बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के इस्तीफे की मांग की, आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही से अपराध बढ़ रहे हैं।
पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया,
एनएसयूआई जो कांग्रेस की छात्र इकाई है, ने इस प्रदर्शन को राज्य में बढ़ते अपराधों के खिलाफ एक बड़ा कदम बताया।
प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से देहरादून जिले में हाल ही में हुई हत्याओं से आक्रोशित थे।
इन घटनाओं में पुलिस की कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए कहा, “कानून व्यवस्था चरमरा गई है, DGP इस्तीफा दो!” और “पुलिस की नाकामी, जनता भुगत रही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन अपराधों को रोकने में असफल साबित हो रहा है, जिससे आम नागरिकों, खासकर महिलाओं और युवाओं की सुरक्षा खतरे में है।
घटना का विवरण: प्रदर्शन दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ, जब एनएसयूआई के दर्जनों कार्यकर्ता पुलिस मुख्यालय के बाहर इकट्ठा हुए।
उन्होंने धरना देते हुए पोस्टर्स और बैनर लहराए, जिन पर राज्य में अपराध दर बढ़ने के आंकड़े और पुलिस की कथित उदासीनता के उदाहरण लिखे थे।
सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन जैसे ही कार्यकर्ता मुख्यालय के अंदर घुसने की कोशिश करने लगे, पुलिस ने हस्तक्षेप किया।
पुलिस ने लाठीचार्ज की धमकी दी और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं में एनएसयूआई के स्थानीय नेता और छात्र शामिल थे, जिन्हें बाद में थाने ले जाया गया।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन बिना अनुमति के था और इससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
एनएसयूआई के एक पदाधिकारी ने कहा, “उत्तराखंड में महिलाओं की हत्याएं हो रही हैं, लेकिन पुलिस सिर्फ मीटिंग्स कर रही है।
डीजीपी को इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि उनकी कमान में कानून व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो गई है।
हम छात्रों की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं, और यह प्रदर्शन जारी रहेगा।”
बैकग्राउंड और हाल की घटनाएं: यह प्रदर्शन उत्तराखंड में हाल के दिनों में बढ़ते अपराधों की पृष्ठभूमि में हुआ है।
3 फरवरी 2026 को डीजीपी दीपम सेठ ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी, जिसमें राज्य के सभी जिलों के एसएसपी और एसपी शामिल थे।
बैठक में देहरादून जिले में दो महिलाओं की हत्याओं की जांच की समीक्षा की गई और दो सब-इंस्पेक्टरों को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया।
एक मामला हरिद्वार के भगवानपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा था, जहां रविदास जयंती के दौरान झड़प और फायरिंग हुई थी।
डीजीपी ने बैठक में अपराधों पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए, लेकिन एनएसयूआई का आरोप है कि ये कदम अपर्याप्त हैं और सिर्फ दिखावा हैं।
राज्य पुलिस मुख्यालय ने बताया कि अपराध और कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए ऐसी बैठकें नियमित हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिख रहा।
कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। एक वीडियो में दिखाया गया है कि कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस मुख्यालय को घेरते हुए बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार के शासन में अपराध बढ़े हैं, जबकि सरकार का दावा है कि पुलिस सक्रिय है और अपराधियों पर कार्रवाई हो रही है।
प्रतिक्रियाएं और आगे की संभावनाएं: पुलिस ने कहा कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि अगर डीजीपी इस्तीफा नहीं देते तो प्रदर्शन और तेज होंगे।
राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है।
स्थानीय निवासियों ने प्रदर्शन का समर्थन किया, कहते हुए कि अपराधों से वे डरे हुए हैं।
यह घटना उत्तराखंड में राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकती है, खासकर युवा और छात्र समुदाय के बीच।
राज्य पुलिस ने अपील की है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें।