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Scam:- उत्तराखंड शिक्षा विभाग में घोटाला तीन करोड़ लेकर चंपत उपनल कर्मचारी

देहरादून 27 अगस्त 2025।

उत्तराखंड शिक्षा विभाग में अनोखा घोटाला सामने आया है। आउटसोर्सिंग कंपनी उपनल के तहत काम करने वाले कर्मचारी ने 3 करोड़ 18 लाख की चपत विभाग को लगा दी।

लगभग ढाई साल तक यह आउट सोसिंग कर्मचारी पीएम पोषण योजना की रकम को अपने खाते में ट्रांसफर करता रहा।

लेकिन मजाल क्या है जो विभाग को इसकी भनक भी लगने दी हो,दरअसल 2022 में पीएम पोषण योजना के लिए आने वाले पैसे को नेट बैंकिंग के जरिए स्कूलों में भेजने की योजना शुरू हुई।

जिसके माध्यम से जिला देहरादून के सभी 800 से ज्यादा स्कूलों को नेट बैंकिंग के माध्यम से पैसा भेजा जाता था।

 यह पैसा स्कूली छात्रों की अटेंडेंस के अनुसार मिलता था यानी जिस स्कूल में जितनी छात्र संख्या मौजूद है उसी के हिसाब से पैसा भेजा जाता था।

जितना पैसा बचता था वह स्कूल के खाते में ही रहता था इस तरह हर महीने देहरादून जिले के लिए डेढ़ से पौने दो करोड रुपए पीएम पोषण योजना के तहत मिलते थे।

 इसमें से तकरीबन 30 से 35 लख रुपए हर महीने बच जाते थे,इसी बीच नवीन सिंह रावत को पीएम पोषण योजना के तहत समन्वय(MIS) के तौर पर नियुक्त किया गया था।

नवीन सिंह रावत ने किसी तरह नेट बैंकिंग के पासवर्ड को हासिल कर लिया और उसने ढाई साल में 3 करोड़ 18 लख रुपए अपने खाते में जमा कर दिए।

नवीन सिंह रावत इस कारनामे को विभाग का कोई भी अधिकारी नहीं पकड़ सका और ना ही यह ऑडिट में किसी  प्रकार से पुष्टि हो पाई की इसमें किस तरह की गड़बड़ी हुई है।

 जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती ने जब खाते की जानकारी मांगी तो इसमें खुलासा हुआ की नवीन सिंह रावत ने 3 करोड़ 18 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर किए है, इसके बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई।

इतना ही नहीं नवीन सिंह रावत ने अपने दो खातों में जमा किए गए सरे रूपए  गूगल पे के माध्यम से तकरीबन 40 से 50 खातों में ट्रांसफर कर दिए।

इसके बाद नवीन गायब हो गया फिलहाल इस मामले पर विभाग ने एफआईआर दर्ज करा दी है और पुलिस आरोपी नवीन की तलाश में जुटी है।

विभाग ने अपने स्तर पर भी इसकी जांच पड़ताल करते हुए इस पूरे मामले की पुष्टि की, वहीं एसपी देहात ऋषिकेश जय बलूनी ने बताया कि मामले की विवेचना चल रही है जल्दी आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा।

फिलहाल आरोपी नवीन सिंह रावत फरार है जिसकी पुलिस तलाश कर रही है,लेकिन सवाल यह उठता है कि विभागीय स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।

जो पासवर्ड गोपनीय था वह नवीन सिंह रावत को कैसे मिला जिसके माध्यम से नवीन 3 करोड़ की चोरी कर विभाग से फरार हो गया है।

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