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Mahapanchayat:-अंकिता भंडारी हत्याकांड पर महापंचायत, वीआईपी की गिरफ्तारी और सुप्रीम कोर्ट निगरानी वाली सीबीआई जांच की मांग तेज

 देहरादून 8 फरवरी 2026।

रविवार को परेड ग्राउंड में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर आयोजित महापंचायत में अंकिता भंडारी हत्याकांड के ‘वीआईपी एंगल’ और मौजूदा सीबीआई जांच को लेकर गुस्सा खुलकर सामने आया।

करीब तीन बजे तक चली इस महापंचायत में अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र भंडारी और सोनी देवी भी मौजूद रहे।

मंच पर गमगीन व आंखों में आसूं लिए सोनी देवी भावुक हो गईं, जबकि वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि लोग कहतेे हैं की इन्होंनेे पैसा लेे लिया है।

उन्होंनेे कहा कि लोगोंं की तो कोई बात नहीं लेकिन मैं अंकिता को क्या जवाब दूंगा जब वह नहींं झुकी तो मैंं क्यों पीछे हटू मैंने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात की थी तो अपनेे मांगपत्र में सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग रखी थी।

 मांग की कि वनांतरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलवाने वाली भाजपा विधायक रेणु बिष्ट की कॉल डिटेल्स निकाली जाएं।

उन्होंने कहा, “पुलकित आर्य समेत सभी अभियुक्तों और संबंधित लोगों की कॉल डिटेल्स सामने आनी चाहिए।

पद्मश्री अनिल प्रकाश जोशी की प्राथमिकी को जांच का आधार नहीं माना जा सकता।”

महापंचायत में जन गीतों के बीच वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि अंकिता ने “एक्स्ट्रा सर्विस” का जमकर विरोध किया और यही उसकी जान का कारण बना।

सभी ने मांग की कि ‘अज्ञात वीआईपी’ को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “सीबीआई जांच पर किसी को भरोसा नहीं है।

सरकार वीआईपी को बचाने में जुटी है। यह कोई राजनीति नहीं है, जो लोग कहते हैं कि राजनीति हो रही है, तो जरूर राजनीति है।”

रावत ने कहा कि हाल ही में हुई तीन अन्य कामकाजी महिलाओं की हत्याओं का भी जिक्र किया और कहा, “आज एक अंकिता नहीं, कई अंकिताएं हैं।”

माकपा नेता समर भंडारी ने कहा, “बिना सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के सीबीआई जांच से न्याय संभव नहीं।

प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। भाजपा का असली चेहरा सामने आ चुका है। वीआईपी को पद से हटाकर उसकी जांच कराई जाए।”

आंदोलनकारी कमला पंत ने आरोप लगाया कि “आनन-फानन में की गई एफआईआर पूरी तरह संदिग्ध है।

अंकिता के माता-पिता की शिकायत पर एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई? उन्हें शुरू से ही मामले से अलग रखा गया।”

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा, “सरकार द्वारा प्रायोजित शिकायत को जांच का आधार नहीं माना जा सकता।

अंकिता को न्याय दिलाने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रहेगा।”

भाकपा माले नेता इंद्रेश मैखुरी ने कहा, “परिवार को जानबूझकर अलग रखा जा रहा है।

जब अंकिता के लिए तैयारी हो रही थी, तब भाजपाई केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का स्वागत कर रहे थे।”

महापंचायत में पांच प्रस्ताव पारित किए गए:

अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो।

जांच अंकिता के माता-पिता की शिकायत पर आधारित हो, अनिल जोशी की प्राथमिकी को दरकिनार किया जाए।

अज्ञात वीआईपी की तुरंत गिरफ्तारी और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

साक्ष्य मिटाने वालों पर भी जांच हो।

राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।

महापंचायत में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भी पढ़कर सुनाया गया।

 महापंचायत इंडिया गठबंधन के कई दलों, राज्य आंदोलनकारियों, सामाजिक संगठनों और जन सरोकारों से जुड़े लोगों के संयुक्त प्रयास से हुई।

परेड ग्राउंड में भारी भीड़ उमड़ी और सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

अंकिता भंडारी (19) की हत्या सितंबर 2022 में ऋषिकेश के वनांतरा रिसॉर्ट में हुई थी।

पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को उम्रकैद की सजा हो चुकी है, लेकिन वीआईपी एंगल अभी भी अनसुलझा है। जनता का कहना है।

— न्याय तब तक अधूरा है, जब तक वीआईपी का नाम और सजा सामने नहीं आ जाती

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