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Study:-जल संरक्षण मॉडल देखने पुरोहितवाला पहुंचे कई देशों के  प्रतिनिधियों ने बाणगंगा क्षेत्र के मॉडल का किया अध्ययन 

देहरादून 27 फरवरी 2026।

जैव विविधता के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा देने के लिए,

गठित अंतराष्ट्रीय संघ आईयूसीएन (इंटरनेशन यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) के प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून स्थित ग्राम पुरोहित वाला,

(बाण गंगा जलागम) क्षेत्र का भ्रमण कर स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन के तहत संचालित कार्यो का अवलोकन किया।

 आईयूसीएन के अंतराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल में 11 देशों से आए 17 प्रतिनिधि शामिल थे।

आईयूसीएन की टीम ने बाणगंगा जलागम क्षेत्र में किए गए विभिन्न संरक्षण उपायों-जैसे वर्षा जल संचयन, स्रोत संरक्षण,

भू-जल पुनर्भरण संरचनाएं, कंटूर ट्रेंच, चेकडैम, चालखाल निर्माण तथा सामुदायिक सहभागिता आधारित जल प्रबंधन कार्यो की विस्तृत जानकारी ली।

प्रभागीय वनाधिकारी नीरज कुमार ने बाणगंगा स्प्रिंग शेड में जल संरक्षण के लिए निर्मित प्राकृतिक संरचनों के निर्माण,

उपयोग और उनसे प्राप्त सकारात्मक परिणामों के संबंध में प्रतिनिधिमंडल को विस्तार से अवगत कराया।

 प्रतिनिधिमंडल ने स्प्रिंग एवं रिजुविनेशन ऑथोरिटी (सारा), वन विभाग एवं स्थानीय समुदाय द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे सामुदायिक सहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

टीम ने कहा कि इस प्रकार के पहलें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती हैं।

 पुरोहितवाला के भ्रमण के उपरांत प्रतिनिधिमंडल मानव भारती एंगल हिल्स स्कूल पहुंचा, जहां स्थानीय नागरिकों ने उनका भव्य स्वागत किया।

प्रतिनिधियों ने स्थानीय निवासियों से संवाद कर उनके अनुभव साझा किए तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया।

एसीईओ सारा, डॉ. कहकशां नसीम ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल स्रोतों के संरक्षण हेतु एक व्यापक अभियान संचालित किया जा रहा है।

इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) द्वारा ब्रिज गैप परियोजना संचालित की जा रही है।

इस परियोजना के अंतर्गत आईयूसीएन ने असम में मेघना नदी के संरक्षण पर कार्य किया है।

साथ ही, उत्तराखंड में जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का अध्ययन करने के उद्देश्य से एक प्रतिनिधिमंडल ने यहां का भ्रमण किया।

डॉ. नसीम ने बताया कि ग्राम पुरोहितवाला में अनौपचारिक रूप से एक जल संरक्षण समूह सक्रिय है,

जिसने सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का उत्कृष्ट संरक्षण किया है।

विशेष रूप से ‘अंगेलिया’ वन क्षेत्र अत्यंत स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित अवस्था में है।

गत वर्षों में ‘सारा’ संस्था और वन विभाग ने संयुक्त रूप से जल एवं मृदा संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं,

जिसके परिणामस्वरूप जल प्रवाह (डिस्चार्ज) में वृद्धि हुई है तथा स्थानीय समुदाय में उत्साह का वातावरण बना है।

इसी उद्देश्य से प्रतिनिधिमंडल को ग्राम पुरोहितवाला क्षेत्र का भ्रमण कराया गया,

ताकि वे प्रत्यक्ष रूप से देख सकें कि किस प्रकार समुदाय जल संरक्षण कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभा रहा है तथा अपने जल स्रोतों और वनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।

आईयूसीएन प्रतिनिधिमंडल में यूनाइटेड किंगडम, नॉर्वे, पोलैंड, जर्मनी, इक्वाडोर, जिम्बाब्वे, अमेरिका, स्पेन, कैमरून, केन्या, ताजिकिस्तान एवं भारत सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

 क्षेत्र भ्रमण के दौरान सारा की एसीईओ डॉ. कहकशां नसीम, उप निदेशक डीएस रावत, डीएफओ नीरज कुमार, अधीक्षण अभियंता संजय रॉय,

अधिशासी अभियंता सिंचाई दीक्षांत गुप्ता, जिला विकास अधिकारी संजीव कुमार एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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