चांदी की कीमतों में इस महीने अभूतपूर्व उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो निवेशकों, उद्योगों और अर्थशास्त्रियों को स्तब्ध कर रहा है।
जहां एक ओर चांदी ने जनवरी में 60-65% की वृद्धि दर्ज की, वहीं दूसरी ओर अचानक गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है।
वैश्विक स्तर पर चांदी की स्पॉट कीमत 29 जनवरी को रिकॉर्ड $120.46 प्रति औंस तक पहुंच गई, लेकिन अगले ही दिन 12-15% की गिरावट के साथ $99-101 प्रति औंस तक लुढ़क गई।
भारत में भी चांदी की कीमतें 30 जनवरी को 7.5% गिरकर 3,57,163 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गईं, जो हाल के पीक 4,20,048 रुपये से 13% कम है।
यह उतार-चढ़ाव AI तकनीक, सोलर एनर्जी और सप्लाई डेफिसिट जैसे कारकों से प्रेरित है, लेकिन विशेषज्ञ बबल की चेतावनी दे रहे हैं।
जनवरी में 60% से अधिक की उछाल
जनवरी 2026 चांदी के लिए ऐतिहासिक महीना साबित हुआ है।
महीने की शुरुआत में चांदी की कीमत करीब $70-80 प्रति औंस के आसपास थी, लेकिन 29 जनवरी तक यह $120.46 तक पहुंच गई, जो सालाना 298% की वृद्धि दर्शाती है।
पिछले एक साल में चांदी की कीमतें 200-300% बढ़ी हैं, जो सोने की तुलना में कहीं अधिक तेज है।
सोने की कीमतें भी $5,600 प्रति औंस तक पहुंची हैं, लेकिन चांदी की रैली ने निवेशकों का ध्यान ज्यादा खींचा है।
इस उछाल के पीछे प्रमुख कारण:
औद्योगिक मांग में वृद्धि: AI कंप्यूटिंग, सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में चांदी का उपयोग बढ़ा है।
2025 से 1 किलोग्राम चांदी बार्स की मांग 550% बढ़ी है।
सप्लाई डेफिसिट: वैश्विक स्तर पर 30 मिलियन औंस का सप्लाई घाटा है, जो कीमतों को ऊपर धकेल रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका-ईरान संघर्ष, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और सेंट्रल बैंक खरीदारी ने सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी को बढ़ावा दिया।
ट्रेडिंग वॉल्यूम: सिल्वर फ्यूचर्स (SI00) के ट्रेडिंग वॉल्यूम 81,000 कॉन्ट्रैक्ट्स तक पहुंचे, जो सामान्य से कहीं अधिक है।
23 जनवरी को चांदी पहली बार $100 प्रति औंस पार कर गई, जो वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
28 जनवरी को कीमत $113.77 प्रति औंस थी, जो 2025 के जनवरी ($30.43) से 274% अधिक है।
अचानक गिरावट: 12-15% का क्रैश और बबल की चेतावनी
उछाल के बाद गिरावट भी उतनी ही तेज आई। 30 जनवरी को चांदी $122 तक पहुंची, लेकिन फिर $111 तक गिर गई, जो 14.33% की दैनिक गिरावट है।
वैश्विक स्पॉट कीमत $99.20 तक लुढ़की, जबकि MCX पर फ्यूचर्स 8.16% गिरकर 3,67,231 रुपये प्रति किलोग्राम पर आए।
इस गिरावट के कारण:
डॉलर की मजबूती: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटी पर दबाव पड़ा।
प्रॉफिट बुकिंग: तेज उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे वॉलेटिलिटी बढ़ी।
टेक स्टॉक्स का असर: AI और टेक स्टॉक्स जैसे माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल और एनवीडिया में गिरावट ने चांदी की औद्योगिक मांग पर सवाल उठाए।
मार्केट डेप्थ की कमी: पतला बाजार होने से छोटे इनफ्लो भी बड़े मूवमेंट्स पैदा कर रहे हैं, जो फिजिकल डिमांड से अलग हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी: बैंक ऑफ अमेरिका ने “बबल-लाइक डायनामिक्स” की बात की है, जहां कीमतें फंडामेंटल्स से 30% ऊपर हैं।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो 45:1 पर 14 साल के निचले स्तर पर है, जो टेक्निकल करेक्शन की संभावना दर्शाता है।
ब्लूमबर्ग और स्टोनएक्स के विश्लेषकों ने अचानक गिरावट की चेतावनी दी है, क्योंकि तेज वृद्धि निवेशकों के व्यवहार को बदल सकती है।
सिटीग्रुप ने 2026 में $150 प्रति औंस की भविष्यवाणी की है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में कंसॉलिडेशन की उम्मीद है।
भविष्य की संभावनाएं और निवेश सलाह
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, चांदी इस तिमाही के अंत तक $105.07 प्रति औंस और 12 महीनों में $115.01 तक पहुंच सकती है।
हालांकि, जनवरी में 35-50% की मासिक वृद्धि के बावजूद, नौ महीनों की लगातार बढ़त जारी रह सकती है।
भारत में सपोर्ट लेवल 3,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वॉलेटिलिटी को देखते हुए पोजीशन साइजिंग पर ध्यान दें।
चांदी की कीमतें सोने से ज्यादा वॉलेटाइल हैं, लेकिन लंबी अवधि में ऊपर की ओर ट्रेंड करती हैं।
महंगाई के खिलाफ हेज और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए चांदी अभी भी आकर्षक है, लेकिन गिरावट का इंतजार करना महंगा साबित हो सकता है।