उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की तहसील के लंढौरा क्षेत्र में शुक्रवार को एक चौंकाने वाली घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया।
ग्राम रनसुरा के एक खेत में ऊंचे पॉपुलर के पेड़ पर एक वयस्क गुलदार (तेंदुआ) उल्टा लटका हुआ मिला, जिसका एक पैर पेड़ की टहनी में बुरी तरह फंस गया था।
गुलदार की यह हालत देखकर स्थानीय ग्रामीणों में दहशत फैल गई, और देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।
वन विभाग की टीम को सूचना देने के बावजूद उनकी देर से पहुंच पर ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी जताई, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
घटना की शुरुआत शुक्रवार सुबह हुई, जब कुछ किसान अपने खेतों में काम करने जा रहे थे।
अचानक उनकी नजर पेड़ पर पड़ी, जहां गुलदार उल्टे मुंह लटका हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुलदार का पिछला पैर टहनी में इस कदर फंस गया था।
कि वह खुद को छुड़ाने में असमर्थ था। अनुमान है कि यह हादसा रात में हुआ होगा,और गुलदार करीब 5 से 6 घंटे तक पेड़ पर फंसा रहा।
“हमने कभी ऐसा दृश्य नहीं देखा, गुलदार छटपटा रहा था, लेकिन नीचे नहीं गिर पा रहा था,” एक स्थानीय किसान राम सिंह ने बताया।
भीड़ के बढ़ते शोर-शराबे और हलचल से गुलदार और ज्यादा बेचैन हो गया, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रही।
ग्रामीणों ने मोबाइल फोन से वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर शेयर किए, जिससे खबर तेजी से फैली।
सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को फोन किया, लेकिन टीम के पहुंचने में काफी देरी हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंचने में कम से कम दो घंटे लग गए, जबकि इलाका वन क्षेत्र से ज्यादा दूर नहीं है।
“अगर समय पर मदद नहीं मिलती, तो गुलदार की जान खतरे में पड़ सकती थी या कोई ग्रामीण घायल हो सकता था,”
एक अन्य ग्रामीण महिला सरोज देवी ने कहा। वन विभाग के अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि टीम को तैयार होने और आवश्यक उपकरण जुटाने में समय लगा, लेकिन ग्रामीणों का आक्रोश कम नहीं हुआ।
आखिरकार, वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
गुलदार की छटपटाहट को देखते हुए, टीम ने पहले उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया, ताकि वह शांत हो सके।
इसके बाद, पेड़ को सावधानीपूर्वक काटा गया और गुलदार को सुरक्षित नीचे उतारा गया।
उसे एक विशेष पिंजरे में बंद कर वन विभाग की गाड़ी में ले जाया गया।
दिलचस्प बात यह रही कि रेस्क्यू के बाद भी सैकड़ों ग्रामीण वाहन के पीछे-पीछे चलते रहे, जिससे स्थिति और संवेदनशील बनी।
वन अधिकारियों को भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। गुलदार को अब एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है, जहां वेटरनरी डॉक्टरों की टीम उसकी देखभाल कर रही है।
फिलहाल, उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन पैर में फंसने से लगी चोटों का इलाज जारी है।
यह घटना न केवल एक दुर्लभ हादसा है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और रेस्क्यू प्रक्रिया में कई कमियों को उजागर करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुलदार जैसे जंगली जानवरों के मानव बस्तियों के करीब आने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो जंगलों की कटाई और पर्यावरण असंतुलन का परिणाम हैं।
“वन विभाग को ऐसे मामलों के लिए त्वरित रेस्पॉन्स टीम तैयार रखनी चाहिए,” वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट डॉ. अनिल शर्मा ने कहा।
साथ ही, भीड़ की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने शोर मचाकर गुलदार को और परेशान किया, जो जानवर के लिए घातक साबित हो सकता था।
जागरूकता की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है – कई लोग फोटो और वीडियो लेने में व्यस्त थे, बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखने के।
वन विभाग ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है और ग्रामीणों से अपील की है कि भविष्य में ऐसी स्थिति में शांत रहें और अधिकारियों को सूचित करें।
स्थानीय प्रशासन ने भी इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके।
यह घटना एक सबक है कि वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व बनाए रखने के लिए शिक्षा और त्वरित कार्रवाई दोनों जरूरी हैं।