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Fast:- अहोई अष्टमी, कालाष्टमी और भानु सप्तमी का दुर्लभ संयोग, संतान की सुख-समृद्धि के लिए माताएं रखेंगी व्रत

पंचूर वार्ता | धर्म-दर्शन

देहरादून, 01 नवंबर, 2026।

रविवार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी-अष्टमी तिथि के संयोग में इस बार धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाले,

अहोई अष्टमी, कालाष्टमी और भानु सप्तमी पर्व का संयोग बन रहा है।

यह दिन विशेष रूप से माताओं की आस्था, संतान की खुशहाली और परिवार की सुख-समृद्धि से जुड़ा है।

अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए रखती हैं।

इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शाम को अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं और तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करती हैं।

कालाष्टमी पर होगी भगवान भैरव की पूजा

कालाष्टमी के अवसर पर भगवान शिव के रौद्र स्वरूप भगवान कालभैरव की पूजा-अर्चना की जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भय, नकारात्मकता और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

श्रद्धालु भगवान भैरव को दीपक, पुष्प और प्रसाद अर्पित कर सुख-शांति की कामना करते हैं।

भानु सप्तमी पर सूर्य उपासना का विशेष महत्व

रविवार को सप्तमी तिथि होने के कारण भानु सप्तमी का भी संयोग बन रहा है।

इस दिन सूर्य देव की पूजा, सूर्य को अर्घ्य देने और मंत्र जाप करने का विशेष महत्व माना जाता है।

श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित कर परिवार की खुशहाली और आरोग्य की कामना करेंगे।

एक दिन में तीन पर्वों का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अहोई अष्टमी, कालाष्टमी और भानु सप्तमी तीनों पर्वों का अपना अलग महत्व है।

जहां अहोई अष्टमी संतान के कल्याण से जुड़ी है, वहीं कालाष्टमी भगवान भैरव की आराधना और भानु सप्तमी सूर्य उपासना का पर्व है।

इस तरह 1 नवंबर का दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक आस्था और पूजा-अर्चना का अवसर रहेगा।

पंचूर वार्ता की ओर से सभी श्रद्धालुओं को अहोई अष्टमी, कालाष्टमी एवं भानु सप्तमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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