धर्म-संस्कृतिNaraka Chaturdashi :- नरक चतुर्दशी आज, यमदीपदान और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व Panchur Varta7 November 20267 November 202601 mins पंचूर वार्ता | धार्मिक समाचार देहरादून, 07 नवंबर 2026। दीपावली पर्व से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे छोटी दीपावली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन, भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध कर हजारों बंदियों को मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता काली की पूजा-अर्चना के साथ यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। मान्यता है कि संध्याकाल में घर के बाहर दीपक जलाकर यमराज से परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है। अभ्यंग स्नान और दीपदान की परंपरा नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की विशेष परंपरा है। इस दिन शरीर पर तेल और उबटन लगाकर स्नान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति को सौंदर्य, आरोग्य एवं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शाम के समय घरों के बाहर और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। इसे यमदीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। भगवान श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध पौराणिक कथा के अनुसार नरकासुर नामक असुर ने देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान कर रखा था। उसने हजारों कन्याओं को बंदी बना लिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर बंदियों को मुक्त कराया। इस घटना को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। छोटी दीपावली से जगमगाते हैं घर-आंगन नरक चतुर्दशी के अवसर पर लोग घरों की साफ-सफाई कर दीपों से सजावट करते हैं। बाजारों में भी दीपावली को लेकर रौनक देखने को मिलती है। मिट्टी के दीये जलाकर अंधकार को दूर करने और जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नरक चतुर्दशी का पर्व हमें संदेश देता है कि जीवन से बुराइयों, अहंकार और नकारात्मकता को दूर कर सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। पंचूर वार्ता | धार्मिक समाचार तिथि संबंधी जानकारी: 7 नवंबर को चतुर्दशी तिथि प्रारंभ हो रही है और 8 नवंबर को सुबह तक रहेगी। अभ्यंग स्नान की तिथि और मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देंखें। ये भी पढ़ें: Shani Dosha:- शनिवार को शनिदेव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व, तेल का दीपक जलाने और दान करने से मिलती है शनि दोष से मुक्ति की कामना Post navigation Previous: Shani Dosha:- शनिवार को शनिदेव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व, तेल का दीपक जलाने और दान करने से मिलती है शनि दोष से मुक्ति की कामना Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ
Shani Dosha:- शनिवार को शनिदेव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व, तेल का दीपक जलाने और दान करने से मिलती है शनि दोष से मुक्ति की कामना Panchur Varta7 November 20267 November 2026 0
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