उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और बेशकीमती संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य की बेशकीमती सरकारी जमीनों को औने-पौने दामों पर निजी कंपनियों को लीज पर दिया जा रहा है।
पार्टी ने ऐसे सभी फैसलों को निरस्त करने और यूआईआईडीबी व सिडकुल को हस्तांतरित संपत्तियों को उनके मूल विभागों को वापस लौटाने की मांग की।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट मसूरी की लीज निरस्त करने,
सरकारी संपत्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने तथा मुख्यमंत्री स्तर पर अकेले लिए गए,
भूमि संबंधी निर्णयों को रद्द करने का अनुरोध किया।
कांग्रेस ने दी चेतावनी कि ज्ञापन सौंपे जाने के 10 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी जनता की संपत्तियों की रक्षा के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।
जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज पर उठाए सवाल-
कांग्रेस ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय के जरिए सभी विभागों की सरकारी भूमि पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री को केंद्रित कर दिया गया।
पार्टी ने इसे संविधान के सामूहिक उत्तरदायित्व और सरकार की कार्य नियमावली के विपरीत बताया।
प्रतिनिधिमंडल ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला उठाते हुए कहा कि करीब 142 एकड़ भूमि और राष्ट्रीय धरोहर को 15 वर्षों के लिए लगभग एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर निजी कंपनी को दिया गया।
कांग्रेस का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल तीनों कंपनियों का संबंध एक ही व्यक्ति से था।
पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की।
40 सरकारी संपत्तियों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप-
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यूआईआईडीबी अधिनियम-2023 और सरकार की कार्य नियमावली के प्रावधानों की अनदेखी कर,
कई सरकारी संपत्तियों को हस्तांतरण और लीज की प्रक्रिया में शामिल किया गया।
पाटकोट-मरचूला, सलेमपुर महमूद और माजरी ग्रांट सहित कई स्थानों की जमीनों का उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जमीनों का हस्तांतरण राजस्व अभिलेखों और स्पष्ट पैमाइश के बिना किया गया।
पटवाडांगर की जमीन को लेकर राजस्व अभिलेखों में स्थिति स्पष्ट नहीं होने तथा डाकपत्थर की भूमि बंदोबस्त पूरा होने से पहले हस्तांतरित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए।
पार्टी ने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की संपत्तियों, हरिद्वार के अलकनंदा होटल, ऋषिकेश सहित 25 निरीक्षण भवनों तथा रामगढ़ के राजकीय उद्यान की भूमि को लेकर भी आपत्ति जताई।
कांग्रेस के अनुसार करीब 40 सरकारी संपत्तियां प्रदेश के 12 जिलों में स्थित हैं और उनका बाजार मूल्य लगभग एक लाख करोड़ रुपये बताया गया है।
तीन टेंडर तत्काल निरस्त करने की मांग
कांग्रेस ने यूआईआईडीबी के तीन टेंडरों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। इनमें पटवाडांगर, हरिद्वार स्थित अलकनंदा होटल और ऋषिकेश निरीक्षण भवन से संबंधित टेंडर शामिल हैं।
इसके साथ ही यूआईआईडीबी और सिडकुल को दी गई सभी जमीनें एवं संपत्तियां मूल विभागों को लौटाने तथा लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को पीपीपी मोड में देने की प्रक्रिया रोकने की मांग की गई।
मंत्री गणेश जोशी के आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले को भी राज्यपाल के सामने उठाया।
कांग्रेस ने कहा कि इस प्रकरण में न्यायालय की ओर से मुकदमा दर्ज करने की अनुमति से संबंधित निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक आवश्यक अनुमति प्रदान नहीं की है।
पार्टी ने तत्काल वैधानिक अनुमति देने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।
कोरोना काल की भर्तियों और एमबीबीएस दाखिलों की जांच की मांग
कांग्रेस ने सहकारिता विभाग में कोरोना काल के दौरान हुई भर्तियों में कथित अनियमितताओं का मामला उठाते हुए,
स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि इन भर्तियों में अभ्यर्थियों से 20-20 लाख रुपये लेकर नौकरियां दिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं।
इसके अलावा प्रदेश में एमबीबीएस की सीटों पर कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए दाखिलों की समयबद्ध जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई।
मंत्री रेखा आर्य से जुड़े 210 करोड़ के आरोपों की भी जांच मांगी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्यपाल के समक्ष कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़ा मामला भी उठाया।
उन्होंने बताया कि मंत्री के पति की ओर से उन पर 210 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है।
कांग्रेस ने इस प्रकरण की सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की।
10 दिन का अल्टीमेटम, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी-
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से सभी मामलों में हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
पार्टी ने कहा कि सरकारी संपत्तियों के हस्तांतरण, कथित भर्ती घोटालों और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यदि 10 दिनों के भीतर विवादित निर्णय वापस लेकर संपत्तियां मूल विभागों को नहीं लौटाई गईं तो कांग्रेस उच्च न्यायालय की शरण लेगी।
प्रतिनिधिमंडल में ये नेता रहे शामिल
राज्यपाल से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य,
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत,
विधायक मदन बिष्ट, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह और राजीव महर्षि,
प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, सुरेंद्र सिंह रांगड़ और राजेश चमोली सहित अन्य नेता शामिल रहे।