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Rumors:- इस्लामिक विचारक डॉ. शालिनी अली ने वक़्फ़ संशोधन विधेयक पर भ्रम और अफवाहों को सिरे से खारिज किया 

देहरादून  – समाजसेवी एवं इस्लामिक विचारक सुधारक डॉ. शालिनी अली ने देहरादून में आयोजित एक प्रभावशाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर फैले भ्रम और अफवाहों को सिरे से खारिज किया और इसे ऐतिहासिक और समाजहित में लिया गया निर्णय बताया।

उन्होंने इस संवाद के माध्यम से वक्फ पर एक व्यापक जनजागरण अभियान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य मुस्लिम समाज में जिम्मेदारी, पारदर्शिता और महिला नेतृत्व की भूमिका को मजबूत करना है।

डॉ. शालिनी ने कहा कि वक्फ एक पवित्र सामाजिक और धार्मिक संस्था है, जिसका मूल उद्देश्य मुस्लिम समाज के गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद वर्गों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास की व्यवस्था करना है।

लेकिन दुर्भाग्यवश वर्षों से यह संस्था लैंड माफियाओं, भ्रष्ट तत्वों और ‘लैंड जिहाद’ जैसी गतिविधियों का शिकार रही है। ऐसे में सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वह समय की मांग और इस्लामी मूल्यों के अनुरूप मानती हैं।

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उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्डों में दो महिलाओं की उपस्थिति अब अनिवार्य की गई है, जो मुस्लिम महिलाओं को निर्णय-निर्माण की मुख्यधारा में लाने का स्वागत योग्य और साहसिक निर्णय है।

“कुरान, हदीस और शरीयत की रोशनी में भी यह कदम पूरी तरह जायज़ है। मुस्लिम महिलाओं को न सिर्फ पर्दे के पीछे रहना है, बल्कि वक्फ जैसी जिम्मेदार संस्थाओं में नेतृत्व भी निभाना है,” उन्होंने जोड़ा।

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. शालिनी ने यह भी सवाल उठाया कि जब वक्फ की संपत्तियों को कमर्शियल माध्यमों से गैर मुस्लिम किरायेदारों को दिया जा सकता है और उनसे अर्जित राशि मुस्लिम समाज के हित में इस्तेमाल हो सकती है,

तो फिर वक्फ बोर्ड में किसी हिंदू सदस्य की मौजूदगी पर ऐतराज क्यों? उन्होंने कहा कि यह सोच तंग मानसिकता और राजनीतिक एजेंडों से प्रेरित है।

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डॉ. शालिनी ने ‘वक्फ अल औलाद’ की आड़ में चल रही निजी संपत्ति की लालसा को उजागर करते हुए कहा कि कुछ ताकतवर लोग वक्फ की पवित्र भावना को कुचलकर इसे खानदानी जागीर बना चुके हैं।

“यह न सिर्फ इस्लाम के उसूलों के खिलाफ है, बल्कि गरीब मुसलमानों के साथ धोखा भी है।” उन्होंने कहा कि वक्फ अल औलाद कुरान, हदीस और शरीयत की रोशनी में कानून बना है और इस पर अमल लाज़मी है।

बीती रात ‘बत्ती गुल’ कर वक्फ कानून के विरोध में किए गए प्रदर्शन पर डॉ. शालिनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस विरोध को एक राजनीतिक स्टंट बताते हुए कहा,

“आज जब हमारे सैनिक सीमाओं पर देश की रक्षा कर रहे हैं, तब देश में भीतर से विभाजनकारी कार्यक्रम चलाना देशद्रोह से कम नहीं। पाकिस्तान की हरकतों की कड़ी निंदा होनी चाहिए, न कि भारत सरकार के सुधारात्मक कानूनों का विरोध।”

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डॉ. शालिनी ने कहा कि “हमें एक ऐसा मुस्लिम समाज चाहिए जो शिक्षित हो, जागरूक हो और प्रगतिशील सोच रखता हो — जो सिर्फ अपने हक की बात न करे, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाए।

वक्फ संशोधन विधेयक इसी दिशा में उठाया गया जरूरी कदम है और हम इसके समर्थन में गांव-गांव, शहर-शहर अभियान चलाएंगे।

”यह प्रेस कॉन्फ्रेंस न केवल वक़्फ़ कानून के समर्थन में एक सशक्त स्वरूप थी, बल्कि यह उस नए युग की भी घोषणा थी जिसमें मुसलमानों को समाज सुधार, राष्ट्र निर्माण और प्रशासनिक भागीदारी के रास्ते पर ले जाने की ठोस पहल हो चुकी है।

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