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Why Outsiders:- जिला योजना समितियों से पंचायत-निकाय के प्रतिनिधि बाहर क्यों – गोदियाल

देहरादून 30 अप्रैल 2026।

जिला योजना समितियों का चुनाव नही किये जाने को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस पार्टी मुखर हो गई है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य जिला योजना समितियों का गठन ना किये जाने को लेकर नाराजगी व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करने का काम कर रही है।

राज्य में नगर निकायों के चुनाव हुए डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है और पंचायत चुनाव भी नौ महीने पहले सम्पन्न हो चुके हैं,

लेकिन आज तक सरकार ने जिला योजना समितियों का चुनाव नहीं किया गया है।

यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संविधान की स्पष्ट अवहेलना है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 जेड.डी. के तहत हर राज्य में जिला योजना समितियों का गठन अनिवार्य है,

ताकि पंचायतों और नगर निकायों की विकास योजनाओं को समेकित कर जिले का संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।

   सबसे गंभीर बात यह है कि बिना जिला योजना समितियों के विधिवत गठन और चुनाव संपन्न कराए बिना,

प्रदेश के सभी प्रभारी मंत्रियों द्वारा जिला योजना की बैठकें आयोजित कर ली गई हैं।

यह पूरी प्रक्रिया न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ सीधा खिलवाड़ है।

इससे स्पष्ट होता है कि सरकार जानबूझकर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहती है।

गोदियाल ने कहा कि सरकार बताये कि क्या कारण है कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है ?

क्या वजह है कि बिना वैधानिक समिति के ही जिला योजना की बैठकों को अंजाम दिया गया ?

आज स्थिति यह है कि समिति का गठन ना होने से जिले में विकास योजनाएं न तो समन्वित हैं और न ही स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनी है।

इससे न केवल विकास प्रभावित हो रहा है, बल्कि योजनाओं में जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित नही की गई है।

  उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि जिला योजना समितियों के चुनाव/गठन की तिथि तत्काल घोषित की जाए।

बिना वैधानिक समिति के आयोजित की गई सभी जिला योजना बैठकों की समीक्षा की जाए।

पंचायतों और नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनका संवैधानिक अधिकार दिया जाए।

जिला स्तर पर पारदर्शी और जवाबदेह योजना प्रणाली लागू की जाए।

यह मांग केवल एक चुनाव की नहीं,बल्कि राज्य में संविधान द्वारा पंचायत और निकाय में चुने गए जन प्रतिनिधियों की विकास योजनाओं में भागीदारी को सुनिश्चित करने की है।

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