Headlines

Sky:- भारत का फार्मा सेक्टर  नवाचार और युवाओं के लिए नया आकाश-पटेल

नई दिल्ली 17 अप्रैल 2026।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत आज दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर चुका है,

और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विज़न के अनुरूप अब हम केवल जेनेरिक दवा बनाने वाले देश से आगे बढ़कर एक ‘नवाचार-आधारित’ वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर हैं।

हमारी सरकार का उद्देश्य ऐसी नीतियां बनाना है जिससे देश के हर नागरिक कम कीमत में गुणवत्तापूर्ण दवाएं से मिल सकें।

साथ ही सरकार निरंतर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे रही है और भारतीय फार्मा उद्योग को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए काम कर रही है।

भारत की अब तक की सफलता उसकी उत्पादन क्षमता, लागत दक्षता और गुणवत्ता मानकों पर आधारित रही है।

विश्व की लगभग 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं और 60 प्रतिशत वैक्सीन आपूर्ति के साथ देश ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसको देखते हुए भारत सरकार ने 8 से 10 वर्षों में देश को उच्च-मूल्य, नवाचार-आधारित बायोफार्मा और उन्नत चिकित्सीय उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है।

इसकी आधारशिला के रूप में हालिया केंद्रीय बजट में घोषित ₹10,000 करोड़ की ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल महत्वपूर्ण है।

यह कार्यक्रम देश में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार आधारित उद्योगों और अगली पीढ़ी की दवाओं के विकास को गति प्रदान करेगा।

आर्थिक आंकड़े भी इस बात को दर्शाते हैं कि भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वर्तमान में 50 अरब डॉलर का है।

जिस रफ्तार से हम आगे बढ़ रहे हैं, 2030 तक इसके 130 अरब डॉलर तक पहुंचने की पूरी संभावना है।

इसे केवल संख्या नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के लिए बेहतर भविष्य के रोडमैप के तौर पर भी देखने की जरूरत है।

वर्तमान में फार्मास्युटिकल उद्योग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 30 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है।

2030 तक हेल्थकेयर और फार्मा क्षेत्र में 20 से 25 लाख नए रोजगार सृजित होंने की उम्मीद है।

बायोफार्मा, मेडटेक और क्लीनिकल रिसर्च जैसे उभरते क्षेत्रों ने संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं।

हमारी सरकार का मानना है कि युवाओं की सफलता की नींव एक मजबूत शैक्षणिक ढांचे पर टिकी होती है।

इसी विजन को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट में फार्मा सेक्टर के लिए और भी कई क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं।

सरकार ने देश में तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर) स्थापित करने का निर्णय लिया है।

इसके साथ ही, वर्तमान में कार्यरत सात नाईपर संस्थानों को अपग्रेड किया जा रहा है। इन सात संस्थानों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की गई है,

जो अनुसंधान और विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से विशेष क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है,

नाईपर मोहाली में एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल दवाओं की खोज एवं विकास, नाईपर अहमदाबाद में मेडिकल डिवाइसेज,

नाईपर हैदराबाद में बल्क ड्रग्स, नाईपर कोलकाता में फ्लो केमिस्ट्री और सतत विनिर्माण, नाईपर रायबरेली में नोबेल ड्रग डिलीवरी सिस्टम,

नाईपर गुवाहाटी में फाइटोफार्मास्यूटिकल्स तथा नाईपर हाजीपुर में बायोलॉजिकल थेरैप्यूटिक्स पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं।

इन संस्थानों का सीधा लाभ हमारे विद्यार्थियों को मिलेगा। नाईपर केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं रह जाएंगे,

बल्कि वे ऐसे केंद्र बनेंगे जहां छात्र उद्योग की वास्तविक चुनौतियों पर काम करेंगे। इससे हमारे छात्र केवल ‘जॉब सीकर’ नहीं बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ और नवाचारी बनेंगे।

बदलते दौर में काम करने के तरीके बदल रहे हैं। अनुमान है कि 2030 तक फार्मा सेक्टर के लगभग 30-35 प्रतिशत कार्यबल को री-स्किलिंग यानी नए कौशल सीखने की जरूरत होगी।

केयर डिलीवरी, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग की परिभाषाएं बदल रही हैं। डेटा विश्लेषण, डिजिटल हेल्थ और नियामक मामलों में उच्च कौशल वाले युवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी।

हमारी सरकार का ध्यान इसी ‘स्किल गैप’ को भरने पर है। हम चाहते हैं कि हमारे छात्र क्लीनिकल रिसर्च और अनुसंधान और विकास में विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करें।

शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करना हमारी प्राथमिकता है।

जब तक हमारे कॉलेजों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम और उद्योग की जरूरतें एक समान नहीं होंगी, तब तक हम ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे।

इसीलिए, हम ‘उद्योग-अकादमिक साझेदारी’ को मजबूत कर रहे हैं। इसी दिशा में, शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल बिठाने के लिए नाईपर और उद्योग के बीच 356 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

साथ ही स्किल डेवलपमेंट मिशनों के माध्यम से छात्रों को सीधे कंपनियों के साथ जुड़ने के मौके दिए जा रहे हैं।

इससे न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत एक ग्लोबल इनोवेशन हब बनेगा।

औषधि क्षेत्र का विकास जीडीपी बढ़ाने के साथ-साथ देश के युवाओं को सशक्त बनाने का भी एक मिशन है।

ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की नींव हमारे युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के कंधों पर है।

नाईपर का विस्तार और बजट में किए गए प्रावधान इस बात का प्रमाण हैं। हम एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं,

जहां एक छात्र अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत से वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सके।

भारत के औषधि क्षेत्र का यह स्वर्णिम युग हमारे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है।

ये भी पढ़ें:   Sample:- खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दून के प्रमुख होटल से खाने के लिए सैंपल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *