राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देहरादून में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करते हुए बिच्छू घास (नेटल फाइबर) से निर्मित वस्त्र की खरीद की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना और प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों एवं बुनकरों को सम्मान और बाजार उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को अपनाने और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं।
पारंपरिक उत्पादों को मिल रही राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के अनेक पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के कई विशिष्ट उत्पादों को GI टैग सहित विभिन्न स्तरों पर पहचान मिली है।
इससे स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उत्पादों को आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है।
इसके लिए सरकार बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को प्रशिक्षण, विपणन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है।
स्वयं भी स्थानीय उत्पादों को देते हैं प्राथमिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं भी हस्तनिर्मित वस्त्रों और स्थानीय उत्पादों के उपयोग को प्राथमिकता देते हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बिच्छू घास से बने वस्त्र की खरीद को भी इसी संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है।
इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों के प्रति आम लोगों में भी रुचि बढ़ाने का संदेश गया।
मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से मिल रहे बाजार
राज्य सरकार की ओर से बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए विभिन्न मेलों,
प्रदर्शनियों तथा विपणन मंचों पर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को केवल सरकारी आयोजनों तक सीमित न रखते हुए उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाना है,
ताकि कारीगरों की आय में वृद्धि हो सके और युवा पीढ़ी भी पारंपरिक हुनर से जुड़ सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार कार्य किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ ही बुनकरों एवं कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के माध्यम से मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्थानीय उत्पादों को खरीदने और उनका उपयोग बढ़ाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जब लोग स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं को प्राथमिकता देते हैं तो इसका सीधा लाभ बुनकरों,
शिल्पकारों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को मिलता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होने के साथ ही पारंपरिक कला और संस्कृति का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान यहां की प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ इसकी समृद्ध लोक कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक हुनर से भी है।
सरकार इन विरासतों को संरक्षित करते हुए इन्हें आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।