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देहरादून, 14 सितंबर 2026।
देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है।
भगवान श्रीगणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व पर मंदिरों, घरों और सार्वजनिक पंडालों में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है।
सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ गणेश मंदिरों में दर्शन के लिए उमड़ रही है और “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश का जन्म हुआ था।
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, बुद्धि, विवेक और समृद्धि का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है।
इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर आकर्षक गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, सफलता और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन भी किए जा रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश-
इस वर्ष पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाओं को लेकर लोगों में विशेष जागरूकता देखने को मिल रही है।
मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी प्रतिमाओं की स्थापना को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सके।
प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने भी लोगों से पर्यावरण हितैषी तरीके से गणेश उत्सव मनाने की अपील की है।
क्या है गणेश चतुर्थी का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश की आराधना करने से जीवन के सभी विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं ,
तथा ज्ञान, बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए गणेश चतुर्थी का पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
श्रद्धालुओं से अपील-
धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं से त्योहार को सौहार्दपूर्ण, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाने का आग्रह किया है।
साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन करने की भी अपील की गई है।
गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया! गणेश चतुर्थी का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नई ऊर्जा लेकर आए, यही कामना है।