Headlines

Complete Five Years :-राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) मंगलवार को अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करेंगे

देहरादून 14 सितम्बर, 2026।

 लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) 15 सितंबर, 2026 को उत्तराखण्ड के राज्यपाल के पद पर 5 वर्ष पूरा कर रहे हैं।

15 सितम्बर, 2021 को राज्यपाल के पद का दायित्व संभालने के बाद से राज्यपाल ने प्रदेश के विकास और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं।

उन्होंने अपने कार्यकाल की शुरुआत में रिवर्स पलायन, महिला सशक्तीकरण एवं बालिका शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं तकनीक,

जैविक एवं प्राकृतिक कृषि तथा वेलनेस को पांच प्रमुख मिशन के रूप में निर्धारित किया। पिछले पांच वर्षों में इन प्राथमिकताओं को शिक्षा,

शोध, तकनीक, स्वास्थ्य, युवा, महिला सशक्तीकरण और जनभागीदारी से जोड़ते हुए अनेक अभिनव प्रयास किए गए हैं।

 राज्यपाल ने कुलाधिपति के रूप में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए

‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च’ जैसी पहल शुरू की और शोध को केवल अकादमिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए उसे धरातल पर लागू करने पर विशेष जोर दिया।

उच्च शिक्षा की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड कॉलेज एफिलिएशन पोर्टल विकसित किया गया।

इससे महाविद्यालयों और संस्थानों की संबद्धता प्रक्रिया ऑनलाइन और समयबद्ध हुई। कुलपति चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए इंटरेक्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की गई।

   विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर संवाद और उपलब्धियों के आदान-प्रदान के लिए ‘यूनिवर्सिटी कनेक्ट उत्तराखण्ड’

तथा निजी विश्वविद्यालयों के लिए ‘यूनिसंगम’ मोबाइल एप शुरू किए गए।

पहली बार निजी विश्वविद्यालयों को भी एक साझा मंच पर लाकर प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका को मजबूत करने के लिए नियमित संवाद की व्यवस्था विकसित की गई।

   राज्यपाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को उत्तराखण्ड के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम माना और इसे लोक भवन की कार्यप्रणाली से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सामाजिक क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए।

लोक भवन, देहरादून में एआई आधारित स्मार्ट ऑटोमेशन सिस्टम, ई-पास, ऑनलाइन मैनेजमेंट सिस्टम,

लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम, डिजिटल डैशबोर्ड और ई-ऑफिस जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गईं।

इससे लोक भवन की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, आधुनिक और प्रभावी हुई।

लोक भवन को डिजिटल रूप से लोगों से जोड़ने के लिए वर्चुअल टूर तैयार किया गया।

इसके माध्यम से लोग बोनसाई गार्डन, नक्षत्र वाटिका, राजप्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर, आरोग्यधाम, राजलक्ष्मी गौशाला और पुस्तकालय सहित लोक भवन परिसर की विभिन्न विशेषताओं का डिजिटल भ्रमण कर सकते हैं।

 लोक भवन, देहरादून और नैनीताल की परिसंपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया गया तथा सामग्री पर बार कोड लगाए गए।

‘गार्गी नारी शक्ति’ एआई चैटबॉट महिलाओं को कानूनी सहायता, करियर, वित्तीय साक्षरता, सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में अभिनव प्रयास है।

वहीं ‘इटरनल गुरु’ एआई चैटबॉट के माध्यम से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं और गुरबाणी के आध्यात्मिक संदेश को तकनीक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

राज्यपाल ने ‘उत्तराखण्ड एआई मिशन-2025’ की शुरुआत के साथ एआई को प्रदेश की विकास आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।

इसके बाद ‘एआई फॉर ऑल’ जैसी पहल के माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को एआई की आधुनिक शिक्षा और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से जोड़ने का प्रयास किया गया।

इसी क्रम में ‘ऑपरेशन साथी’, ‘आरोही इन्क्यूबेटर’ और एआई थीम रुम की शुरुआत की गई।

ऑपरेशन साथी के माध्यम से प्रदेश के सभी 13 जिलों में विद्यार्थियों, युवाओं, शोधकर्ताओं, महिला उद्यमियों, किसानों,

स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय नवप्रवर्तकों की प्रतिभा एवं विचारों की पहचान की जा रही है।

आरोही इन्क्यूबेटर इन विचारों को मार्गदर्शन, शोध, निवेश और स्टार्टअप के अवसरों से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।

एआई थीम रुम के माध्यम से एआई और तकनीकी नवाचारों को जन-जन से जोड़ने की कवायद की जा रही है।

   5 वर्षों में राज्यपाल ने प्रदेश के सभी जिलों का कई बार दौरा कर अधिकारियों के साथ बैठक और स्थानीय लोगों से संवाद किया।

सीमांत क्षेत्रों और वाइब्रेंट विलेज पर विशेष ध्यान देते हुए राज्यपाल ने 51 वाइब्रेंट विलेज में से 30 गांवों का दौरा किया है।

इन क्षेत्रों में स्थानीय लोगों, युवाओं और पूर्व सैनिकों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और संभावनाओं को समझने का प्रयास किया गया।

युवा प्रतिभाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने, सेना और पूर्व सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने,

तथा विद्यार्थियों को देश के विभिन्न हिस्सों से परिचित कराने के लिए राष्ट्रीय एकता, सद्भावना और शैक्षिक भ्रमण जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया गया।

महिला सशक्तीकरण और बालिका शिक्षा राज्यपाल की प्राथमिकताओं में लगातार प्रमुख रहे हैं।

लोक भवन परिसर में बालिका आत्मरक्षा एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

इसका उद्देश्य बालिकाओं को आत्मरक्षा, डिजिटल शिक्षा और भविष्य के रोजगार के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराना है।

महिला उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य, सुरक्षा और नेतृत्व से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।

एआई आधारित ‘गार्गी नारी शक्ति’ पहल इसी प्रयास को तकनीक से जोड़ती है।

 राज्यपाल ने टीबी मुक्त भारत अभियान में सक्रिय भूमिका निभाते हुए स्वयं भी निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की सहायता की।

उनके मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में निक्षय मित्रों को इस अभियान से जोड़ा गया। स्वयं राज्यपाल ने 93 टीबी रोगियाें के निक्षय मित्र बनकर उनकी मदद की है।

लोक भवन में टीबी, मानसिक स्वास्थ्य, ब्रेस्ट कैंसर, आर्थराइटिस, आयुर्वेद, मर्म चिकित्सा, वित्तीय एवं कर साक्षरता सहित विभिन्न जनोपयोगी विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम और सेमिनार आयोजित किए गए।

वेलनेस की दिशा में लोक भवन परिसर में आरोग्यधाम की स्थापना की गई, जहां पंचकर्म, मर्म चिकित्सा और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से स्वास्थ्य एवं वेलनेस को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

  पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए लोक भवन परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सहित विभिन्न प्रयास किए गए।

वर्षा जल संरक्षण से लगभग 200 किलोलीटर पानी के संरक्षण एवं बचत की व्यवस्था की गई। हरियाली बढ़ाने के साथ जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश भी दिया गया।

लोक भवन परिसर में बहुउद्देशीय भवनों के निर्माण की नींव सुगम एवं प्रभावी कार्यप्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

आधुनिक सुविधाओं से युक्त इन ग्रीन बिल्डिंग्स का निर्माण पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।

आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ते हुए ‘नक्षत्र वाटिका’ की स्थापना की गई,

जिसमें 27 नक्षत्रों से संबंधित 27 पौधों को स्थान दिया गया है।

लोक भवन के बोनसाई गार्डन का भी विस्तार किया गया, जिसमें 500 से अधिक पौधों का संरक्षण किया जा रहा है।

गौशाला की स्थापना के साथ भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को भी परिसर से जोड़ा गया है।

पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की समस्याओं के समाधान के लिए लोक भवन में शिकायत निवारण अधिकारी की व्यवस्था की गई।

इसके साथ ही समय-समय पर जनता मिलन कार्यक्रम आयोजित कर राज्यपाल ने स्वयं लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके समाधान के निर्देश दिए।

प्रदेश में स्थित केंद्रीय संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए उनके प्रमुखों के साथ नियमित बैठकें की गईं।

इससे केंद्रीय संस्थानों की विशेषज्ञता और संसाधनों को उत्तराखण्ड के विकास से जोड़ने का प्रयास किया गया।

लोक भवन में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियमित परिवार मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए,

जिसमें उनकी व्यक्तिगत एवं कार्यालयी समस्याओं को सुना गया और उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित किया गया।

इससे संस्थान में टीम भावना को मजबूत करने का प्रयास हुआ।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) की पांच वर्ष की यात्रा में संवैधानिक दायित्वों के साथ-साथ सेवा, संवाद, तकनीक,

नवाचार और जनभागीदारी पर विशेष जोर दिखाई देता है। उत्तराखण्ड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा से लेकर एआई,

शोध से लेकर स्टार्टअप, स्वास्थ्य से लेकर वेलनेस, महिला सशक्तीकरण से लेकर युवा प्रतिभा और पर्यावरण संरक्षण से लेकर सीमांत क्षेत्रों तक अनेक पहल की गई हैं।

   5 वर्षों की यात्रा में राज्यपाल का उद्देश्य यही रहा है कि उत्तराखण्ड की प्रतिभा, संसाधन और संभावनाएं प्रदेश के विकास की शक्ति बनें,

और देवभूमि उत्तराखण्ड को विकसित भारत@2047 की यात्रा में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाने वाला राज्य बनाया जा सके।

ये भी पढ़ें:   Devotees:-गंगोत्री धाम की यात्रा ने रचा इतिहास पहली बार पहुंचे 7.84 लाख से अधिक श्रद्धालु

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *