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Scientific Surveys:- केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वेक्षण, ग्लेशियल झील विस्फोट बाढ़ जोखिम का आकलन करेगी विशेषज्ञों की टीम

उत्तरकाशी, 15 सितंबर 2026।

राष्ट्रीय हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (जीएलओएफ) जोखिम शमन कार्यक्रम के तहत उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण और स्थलीय संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए विभिन्न संस्थानों के 20 सदस्यीय विशेषज्ञ दल को मंगलवार को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) परिसर, उत्तरकाशी से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

जानकारी के अनुसार, विशेषज्ञ दल 15 से 21 सितंबर तक केदारताल क्षेत्र में बैथमेट्री सर्वेक्षण, स्थलीय निरीक्षण और संयुक्त अध्ययन करेगा।

इस दौरान झील की गहराई, जल भंडारण क्षमता, आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों तथा पर्यावरणीय बदलावों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।

साथ ही संभावित हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (Glacial Lake Outburst Flood-GLOF) के जोखिम का भी आकलन किया जाएगा।

इस अभियान में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए), वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून,

राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान लखनऊ,

आईटीबीपी और जिला प्रशासन सहित कई विशेषज्ञ संस्थान संयुक्त रूप से भाग ले रहे हैं।

दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारताल तक वैज्ञानिक उपकरण और आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए लगभग 20 सदस्यीय पर्वतीय पोर्टर दल भी विशेषज्ञ टीम के साथ रवाना किया गया है।

यह दल सर्वेक्षण कार्य को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में स्थित ग्लेशियल झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

झील की गहराई, जल की मात्रा, आसपास की भौगोलिक संरचना और समय के साथ होने वाले परिवर्तनों के आंकड़े भविष्य में संभावित आपदाओं के जोखिम का सटीक आकलन करने में सहायक होते हैं।

इस सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा तथा किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा सकेगी।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने अभियान में शामिल सभी विशेषज्ञों, अधिकारियों और पर्वतीय पोर्टर दल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में इस तरह के अभियान चुनौतीपूर्ण होते हैं,

लेकिन विभिन्न विभागों और संस्थानों के बेहतर समन्वय से इसे सफलतापूर्वक पूरा किया जाएगा।

इस अवसर पर अपर सचिव आपदा प्रबंधन प्रकाश चंद, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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