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DehradunNews:- ध्यान लगने के लिए कुछ दिशा निर्देश भाग चार

देहरादून –  ध्यान लगाने से पहले साधक को सदा विवेक और वैराग्य के भाव में रहना चाहिए।यदि हमने इस जीवन में अभी से ईश्वर-साक्षात्कार के मार्ग पर बढ़ना प्रारम्भ नहीं किया, तो उपनिषद् के ऋषि कहते हैं

इह चेदवेदीदध सत्यमस्ति न चेविहावेदीन्महती विनष्टिः। भूतेषु भूतेषु विचित्य धीराः प्रेत्यास्माओकादमृता भवन्ति।।

इस मन्त्र का तात्पर्य यह है कि जो मनुष्य अभी से धर्मविचार में रत होकर परमात्मा को जानने का यत्न करता है, वही सफल होता है।

इसके विपरीत जो मनुष्य जीवन को केवल संसारी कार्यों में लगाये रखता है. वह अपनी महती हानि कर रहा है।

इस पूरी प्रक्रिया में कुछ बहुत ही आवश्यक नियम एवं सावधानियों भी है. जिनका पालन प्रत्येक साधक को करना नितान्त आवश्यक है।

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