DehradunNews:-प्राणोत्थान’ कुण्डलिनी जागरण का प्रथम सोपान है
देहरादून – ध्यानाोपयोगी आसन में बैठकर मेरुदण्ड को सीधा रखने से सुषुम्णा से निकले नाडी गुच्छकों में ‘प्राण’ सरलता से गमनागमन करने लगता है। मेरुदण्ड के झुक जाने से संकुचित बने स्नायु-गुच्छक, अनावश्यक और अवरोधक कफ आदि से लिप्त होने के कारण प्राण-प्रवेश के अभाव से मलिन ही बने रहते हैं। प्राणमय-रूपी प्राण-साधना के साथ…
