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DehradunNews:- प्राणशक्ति से कुण्डलिनी को करें जागृत

देहरादून – सिद्धयोग के अन्तर्गत कुण्डलिनी का जागरण शक्तिपात द्वारा किया जाता है। यदि कोई परम तपस्वी, साधनाशील सिद्धगुरु मिल जायें तो उनके प्रबलतम ‘शक्तिसम्पात’, अर्थात् मानसिक संकल्प से शरीर में व्याप्त ‘मानस दिव्य तेज’

सिमटकर ध्यान के समय ज्योति या क्रिया की धारा-सी बनकर शरीर में कार्य करने लगता है। आत्मचेतना से पूर्ण यह तेज एक चेतन के समान ही कार्यरत हो जाता है।

सद्‌गुरु के शक्तिपात से साधक को अति श्रम नहीं करना पड़ता, उसका समय बच जाता है और साधना में सफलता भी शीघ्र प्राप्त हो जाती है। परन्तु ऐसे शक्तिपात करनेवाले सिद्धपुरुष का मिलना कठिन है।

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अतः वर्तमान में प्राणशक्ति द्वारा कुण्डलिनी जागृत करना महत्त्वपूर्ण है। योग में षट्कर्म, आसन, प्राणायाम, मुद्रा व बन्ध आदि क्रियाओं द्वारा शरीर योगाग्नि में शुद्ध कर लिया जाता है।

प्राण-साधना से नाड़ियों के शुद्ध होने पर प्रत्याहार के द्वारा इन्द्रियाँ विषयों से हटकर आत्माभिमुखी हो जाती हैं। धारणा द्वारा मन की निश्चलता के साथ साधक पंचभूत-पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश-पर विजय प्राप्त करता है।

चक्र-भेदन करते हुए ध्यान द्वारा कुण्डलिनी को जागृत करने से जीवात्मा परम शिव का साक्षात्कार कर लेता है।

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