देहरादून सिटीज़न्स फोरम, शहर के 500 से अधिक जागरूक और सक्रिय नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक स्वतंत्र मंच,
ने आज एक बार फिर देहरादून को कचरा-मुक्त और कचरा जलाने से मुक्त बनाने की अपनी पुरानी मांग को मजबूती से दोहराया।
इसी मौके पर फोरम ने कन्वर्जेंट डिफेंस फाउंडेशन (CDF) के सहयोग से नागरिक-केंद्रित मोबाइल एप्लिकेशन ‘सफाई मित्र’ लॉन्च किया।
यह ऐप शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का माध्यम बनेगा।
फोरम का परिचय और उद्देश्य
देहरादून सिटीज़न्स फोरम शहर के विभिन्न वर्गों—पेशेवरों, उद्यमियों, शिक्षकों, पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सेवानिवृत्त अधिकारियों,
व्यापारियों और युवाओं—का एक समावेशी प्रतिनिधित्व करता है।
यह फोरम बिना किसी सख्त संगठनात्मक ढांचे के, पूरी तरह लोकतांत्रिक और सामुदायिक भावना से काम करता है।
इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों और प्रशासन के बीच एक सेतु का काम करना है, ताकि संवाद बढ़े, समस्याओं को उजागर किया जा सके और अधिक सहभागी व टिकाऊ शहरी शासन को बढ़ावा मिले।
जमीनी हकीकत पर गहरी नाराज़गी
प्रेस वार्ता का माहौल चिंता और असंतोष से भरा रहा। फोरम के सदस्यों ने देहरादून नगर निगम के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच लगातार बने अंतर पर कड़ी नाराज़गी जताई।
पिछले एक वर्ष में कई आश्वासनों और बैठकों (मेयर संवाद तथा दून लाइब्रेरी में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ) के बावजूद शहर के कई इलाकों में कचरा उठान की अनियमितता, अनियोजित डंपिंग और खुले में कचरा जलाने की घटनाएं जारी हैं।
फोरम के प्रतिनिधियों ने कहा, “संवाद तो काफी हुआ, लेकिन निर्णायक और ठोस कार्रवाई नदारद है।”
जगमोहन मेंदीरत्ता ने फोरम का परिचय देते हुए बताया कि यह समूह सक्रिय नागरिकों का मजबूत नेटवर्क बन चुका है,
जिसमें पूर्व सैनिक, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य क्षेत्रों के अनुभवी पेशेवर शामिल हैं।
रेतु चटर्जी ने फोरम की यात्रा और पिछले एक वर्ष के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि वादों के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आ रहे हैं।
रामना कुमार और नितिन शाह ने नगर निगम के साथ हुए पत्राचार और संवाद का विवरण देते हुए फॉलो-अप की कमी पर प्रकाश डाला, जिससे नागरिकों में निराशा बढ़ रही है।
‘सफाई मित्र’ ऐप की खासियतें
फोरम ने इस समस्या का रचनात्मक समाधान देते हुए ‘सफाई मित्र’ ऐप लॉन्च किया।
इस अवसर पर मेजर रितेश उनियाल और प्रशांत उनियाल ने बताया कि ऐप के जरिए नागरिक आसानी से अपनी शिकायतें दर्ज कर सकेंगे, जैसे:
कचरा जमा होना
समय पर कचरा न उठना
खुले में कचरा जलाना
ये शिकायतें स्वतः संबंधित विभागों तक पहुंच जाएंगी। प्रारंभिक फीडबैक के आधार पर भविष्य में ऐप को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
अनुप नौटियाल ने स्पष्ट किया कि यह ऐप मौजूदा सरकारी व्यवस्था का विकल्प नहीं,
बल्कि नागरिक भागीदारी को बढ़ाकर अंतिम पायदान पर जवाबदेही सुनिश्चित करने का सहायक माध्यम है।
उन्होंने नगर निगम के वादों को “बदलते लक्ष्य और अधूरे वादे” करार दिया।
फोरम का संदेश
फोरम ने उम्मीद जताई कि नगर निगम और महापौर कार्यालय इस पहल को सकारात्मक रूप से लेंगे और इसे जनता का विश्वास बहाल करने का अवसर मानेंगे।
साथ ही यह भी साफ किया गया कि नागरिक प्रयास सरकारी जिम्मेदारियों का विकल्प कभी नहीं हो सकते।
संस्थागत जवाबदेही और निरंतर प्रशासनिक कार्रवाई अनिवार्य है।
कार्यक्रम के अंत में भारती जैन ने मीडिया और उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया तथा कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध और मापनीय कार्रवाई देखने को मिलनी चाहिए।
उपस्थित प्रमुख सदस्य
इस अवसर पर फोरम के सदस्य शंकर दत्त उनियाल, रिंकू सिंह, देवेंद्र कंडपाल, शिशिर प्रशांत, डॉ. सुमीत अरोड़ा, अभिषेक भट्ट, प्रवीण उप्रेती सहित अन्य कई लोग उपस्थित रहे।
देहरादून सिटीज़न्स फोरम ने दोहराया कि एक स्वच्छ, सुंदर और रहने योग्य देहरादून बनाने के लिए नागरिक भागीदारी के साथ-साथ प्रशासन की सक्रिय जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
अब समय इरादों का नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्यों का है।
यह पहल देहरादून को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, बशर्ते कि प्रशासन इसे गंभीरता से ले और प्रभावी सहयोग दे।