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SIAM Report :- E20 पेट्रोल पर एसआईएएम की रिपोर्ट से बढ़ी हलचल, गुणवत्ता संबंधी चिंताएं प्रधानमंत्री तक पहुंचीं

नई दिल्ली 6 अगस्त 2026।

देशभर में लागू किए जा रहे E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भेजे गए,

एक तकनीकी पत्र में E20 पेट्रोल की गुणवत्ता से जुड़ी कुछ गंभीर चिंताएं सामने आने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी पहुंची।

हालांकि बाद में SIAM ने अपने पत्र को वापस लेते हुए कहा कि उसमें उल्लिखित आंकड़ों के लिए देशभर से अधिक व्यापक और प्रमाणित डेटा जुटाने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में कहा गया था कि कुछ मामलों में E20 पेट्रोल में क्लोराइड तथा नमी (मॉइस्चर) की अधिक मात्रा पाए जाने से फ्यूल पंप, फ्यूल इंजेक्टर,

ईजीआर वाल्व और अन्य ईंधन प्रणाली के पुर्जों में जंग एवं घिसाव जैसी समस्याएं सामने आई हैं।

SIAM ने सुझाव दिया था कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता की निगरानी और भंडारण व्यवस्था को और सख्त बनाया जाए ताकि ऐसी समस्याओं को रोका जा सके।

हालांकि विवाद बढ़ने के बाद SIAM ने स्पष्ट किया कि यह पत्र उद्योग और सरकार के बीच नियमित तकनीकी संवाद का हिस्सा था।

संगठन ने कहा कि पत्र में उल्लिखित आंकड़ों का अभी व्यापक सत्यापन होना बाकी है और इसलिए पूर्व में भेजे गए पत्र को वापस लिया जा रहा है।

SIAM ने यह भी दोहराया कि वह भारत सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति का समर्थन करता है और फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है।

दूसरी ओर, पेट्रोलियम मंत्रालय और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कहा कि E20 पेट्रोल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उपलब्ध कराया जा रहा है।

मंत्रालय के अनुसार देशभर के हजारों पेट्रोल पंपों पर नियमित रूप से पानी और अन्य अशुद्धियों की जांच की जाती है तथा बारिश के दौरान भी विशेष निगरानी रखी जाती है।

केंद्र सरकार का कहना है कि E20 कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना,

किसानों की आय बढ़ाना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

सरकार का दावा है कि विभिन्न परीक्षणों में E20 ईंधन को सुरक्षित पाया गया है, हालांकि इससे कुछ वाहनों में माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

इस बीच E20 को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्ष ने SIAM के शुरुआती पत्र का हवाला देते हुए,

सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और उपभोक्ताओं की चिंताओं का समाधान करने की मांग की है।

वहीं सरकार का कहना है कि नीति वैज्ञानिक परीक्षणों और चरणबद्ध तैयारी के आधार पर लागू की गई है,

तथा गुणवत्ता संबंधी किसी भी शिकायत की जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि E20 कार्यक्रम देश की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसकी सफलता ईंधन की गुणवत्ता,

भंडारण व्यवस्था और वाहनों की तकनीकी अनुकूलता सुनिश्चित करने पर निर्भर करेगी।

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