देशभर में आज श्रद्धा और उत्साह के साथ विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है।
यह पर्व भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है, जिन्हें हिंदू धर्म में सृष्टि का प्रथम वास्तुकार, अभियंता (इंजीनियर) और शिल्पकार माना जाता है।
मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए अनेक दिव्य नगरों, महलों, अस्त्र-शस्त्रों और भवनों का निर्माण किया था।
यही कारण है कि उद्योग, निर्माण, तकनीक, मशीनरी और शिल्प कार्यों से जुड़े लोग इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का वास्तुकार कहा गया है।
उन्होंने स्वर्गलोक, सोने की लंका, द्वारका नगरी, इंद्रपुरी और अनेक दिव्य भवनों का निर्माण किया था।
भगवान विश्वकर्मा को निर्माण कला, वास्तुकला, इंजीनियरिंग, तकनीकी ज्ञान और शिल्पकला का अधिष्ठाता देव माना जाता है।
मान्यता है कि उनकी कृपा से व्यक्ति के कार्यों में दक्षता, रचनात्मकता और सफलता प्राप्त होती है।
इसलिए कारखानों, उद्योगों, निर्माण स्थलों, कार्यालयों और कार्यशालाओं में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा जयंती?
विश्वकर्मा जयंती भगवान विश्वकर्मा के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है।
यह पर्व श्रमिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों, कारीगरों, मशीन ऑपरेटरों,
मैकेनिकों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है।
इस दिन लोग अपने कार्यस्थलों, मशीनों, औजारों, वाहनों और उपकरणों की पूजा करते हैं,
तथा उनके सुरक्षित और सफल संचालन की कामना करते हैं।
कई स्थानों पर मशीनों को साफ-सुथरा कर सजाया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरित किया जाता है।
उद्योगों और कारखानों में विशेष आयोजन
विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर देशभर के औद्योगिक क्षेत्रों, सरकारी विभागों, बिजली उत्पादन इकाइयों,
परिवहन संस्थानों और निजी कंपनियों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मशीनों और उपकरणों की पूजा के साथ कर्मचारियों की सुरक्षा, कार्यकुशलता और उत्पादन क्षमता में वृद्धि की कामना की जाती है।
उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक उपक्रमों, बिजली विभागों, निर्माण एजेंसियों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया जा रहा है।
आधुनिक युग में भी प्रासंगिक है विश्वकर्मा का संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि विज्ञान, तकनीक और नवाचार के इस दौर में भगवान विश्वकर्मा का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो गया है।
उनके जीवन से सृजन, परिश्रम, तकनीकी दक्षता और नवाचार की प्रेरणा मिलती है।
यही कारण है कि इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े लोग उन्हें अपना आराध्य मानते हैं।
समाज को देता है श्रम सम्मान का संदेश
विश्वकर्मा जयंती केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि श्रम, कौशल और सृजनशीलता के सम्मान का भी प्रतीक है।
यह पर्व हमें याद दिलाता है कि समाज और राष्ट्र के विकास में श्रमिकों, कारीगरों, तकनीशियनों और अभियंताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।