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Gold Love:- इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से नहीं घटता भारत का गोल्ड प्रेम, संतुलित नीति की जरूरत – मेंसोन

देहरादून 14 मई 2026।

देश में सोना और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के फैसले को लेकर सर्राफा कारोबारियों में चिंता बढ़ती जा रही है।

इसी मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए देहरादून सर्राफा मंडल के अध्यक्ष सुनील मेंसोन ने कहा कि केवल इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर भारत में सोने की मांग को नियंत्रित नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि सरकार को व्यापारियों के साथ संवाद कर संतुलित नीति बनानी चाहिए,

न कि ऐसे सार्वजनिक बयान देने चाहिए जिनसे सर्राफा व्यापार और उससे जुड़े लाखों लोगों पर नकारात्मक असर पड़े।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए,

ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिसमें समस्या का समाधान राष्ट्रहित और व्यापार हित दोनों को साथ लेकर निकले।

व्यापारियों का दमन किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

सर्राफा मंडल अध्यक्ष ने पिछले डेढ़ दशक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में जब-जब गोल्ड और सिल्वर पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई,

तब-तब आधिकारिक आयात कुछ समय के लिए जरूर घटा, लेकिन मांग समाप्त नहीं हुई।

वर्ष 2011 में भारत ने लगभग 969 टन सोना आयात किया था, उस समय ड्यूटी करीब 2 प्रतिशत थी।

इसके बाद Current Account Deficit (CAD) बढ़ने पर सरकार ने 2012-13 में ड्यूटी बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक पहुंचा दी और 80:20 नियम लागू किया।

उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह हुआ कि दुबई रूट सक्रिय हुआ, अनौपचारिक चैनलों से व्यापार बढ़ा और स्मगलिंग में इजाफा देखने को मिला।

इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों और विवाह आधारित मांग बनी रही।

सुनील मेंसोन ने कहा कि भारत में सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि परिवारों की बचत, महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक प्रतिष्ठा और संकट के समय सहारा माना जाता है।

यही कारण है कि ऊंची कीमतों और टैक्स के बावजूद इसकी मांग बनी रहती है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में इम्पोर्ट ड्यूटी 12.5 प्रतिशत तक पहुंची और 2022 में प्रभावी टैक्स करीब 15 प्रतिशत हो गया।

शुरुआती असर के बाद निवेश मांग, ETF interest और bullion buying फिर बढ़ने लगी। recycled gold market भी तेजी से सक्रिय हुआ।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में ड्यूटी घटने के बाद imports में तेजी आई, विशेष रूप से silver imports रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचे।

इसके बाद 2026 में सरकार ने फिर ड्यूटी बढ़ाकर लगभग 15 प्रतिशत कर दी।

सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बचाना और आयात नियंत्रित करना है, लेकिन इससे MSME jewellers पर दबाव बढ़ता है और organized व unorganized trade के बीच असंतुलन पैदा होने का खतरा रहता है।

सुनील मेंसोन ने कहा कि भारत को केवल “Import Restriction Model” पर नहीं बल्कि “Value Creation Model” पर काम करना होगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि recycled gold ecosystem विकसित किया जाए, bullion banking को मजबूत किया जाए, jewellery exports को बढ़ावा मिले,

MSME jewellers को global retail access दिया जाए और hallmarking व traceability को व्यवहारिक बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि भारत अफ्रीका और अन्य देशों के साथ खनन पार्टनरशिप्स विकसित करे और घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दे,

तो भारत केवल दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता नहीं बल्कि सबसे बड़ा मूल्यवर्धित आभूषण केंद्र बन सकता है।

सिल्वर की बढ़ती मांग पर उन्होंने कहा कि भारत तेजी से दुनिया का सबसे बड़ा चांदी आयातक बनता जा रहा है।

इंडस्ट्रियल डिमांड, सोलर सेक्टर, इन्वेस्टमेंट बाइंग और गिफ्टिंग कल्चर इसके प्रमुख कारण हैं।

इसलिए  चांदी नीति को केवल  बुलियन नहीं बल्कि  रणनीतिक औद्योगिक धातु के रूप में देखा जाना चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा कि भारत में गोल्ड की माँग को केवल कर नीति  से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।

देश को ऐसी संतुलित नीति की जरूरत है जो घरेलू मूल्य संवर्धन, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता, रीसाइक्लिंग पारिस्थितिकी तंत्र, पारदर्शी बुलियन प्रणाली और एमएसएमई सशक्तिकरण को मजबूत करे।

तभी भारत वैश्विक स्तर पर हैंडमेड वैल्यू एडेड ज्वैलरी का सबसे बड़ा केंद्र बन सकेगा।

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