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Lesson :- कक्षा 6 में पढ़ाया जाएगा सहकारिता आंदोलन का पाठ – सहकारिता मंत्री डॉ रावत 

 देहरादून 9 नवंबर 2025।

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 और उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती के अवसर पर,

संस्कृति विभाग ऑडिटोरियम में उत्तराखंड प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के तत्वावधान में भव्य सहकारिता सम्मेलन का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, निबंधक सहकारिता डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट एवं राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद की सचिव डॉ. मीनू शुक्ला पाठक द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ. धन सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी सरकार ने सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए हैं।

सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद पूरे देश में सहकारिता की नई क्रांति आई है, और उत्तराखंड ने इसमें विशेष भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि मिलेट्स मिशन योजना के तहत किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

राज्य सरकार द्वारा समितियों के माध्यम से ₹4800 प्रति क्विंटल की दर से मुंडवा की सीधी खरीद किसानों को बड़ा आर्थिक सहारा दे रही है।

महिलाओं को व्यक्तिगत रूप से ₹21,000, ₹51,000 और ₹1,10,000 तक का ऋण बिना गारंटी के दिया जाएगा,

जिससे महिलाएं रोजगार एवं आय सृजन से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ा सकें।

 राष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने हेतु सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत दर्शन यात्रा के लिए ₹1 लाख, ₹2 लाख और महिला समूहों को ₹3 लाख तक का ऋण प्रदान किया जाएगा।

अब स्कूली बच्चों को पढ़ाया जाएगा सहकारिता आंदोलन का पाठ

डॉ. रावत ने कहा कि उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं को कक्षा 6 से सहकारिता आंदोलन का पाठ अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा।

इस संबंध में निबंधक को एक समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य स्तर पर तैयार यह प्रस्ताव भारत सरकार को भी भेजा जाएगा ताकि केंद्रीय विद्यालयों में भी इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से अब ठेली-रेहड़ी व्यवसायियों को मात्र 5% ब्याज दर पर 3 से 5 दिन के अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।

जब आम आदमी की आय बढ़ेगी, तभी प्रदेश और देश आत्मनिर्भर बन सकेगा,” डॉ. धन सिंह रावत ने कहा।

माधो सिंह भंडारी सामूहिक सहकारी खेती बनी सफलता का मॉडल

मंत्री ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों पौड़ी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ में सहकारिता मेले सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं,

जिनमें 70,000 से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी रही। पौड़ी जनपद में बंजर भूमि पर फूलों की खेती “वेस्ट से बेस्ट” का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।

आगामी दिनों में उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, उधमसिंह नगर और चंपावत में भी सहकारिता मेले आयोजित किए जाएंगे।

निबंधक सहकारिता डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने कहा कि सहकारिता विभाग राज्य की प्रगति का आधार है।

किसान यदि संपन्न होगा तो देश संपन्न होगा। हमें अभी सहकारिता समितियों (PACS) की नींव को और मजबूत करना होगा।

उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय ऋण वितरण योजना और मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना को माइलस्टोन बताते हुए इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

डॉ. मीनू शुक्ला पाठक ने कहा ‘सहकारिता आंदोलन है जनभागीदारी का आंदोलन’

राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद की सचिव डॉ. मीनू शुक्ला पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारिता आंदोलन तभी सफल होगा,

जब इसमें महिला शक्ति और युवाओं की सक्रिय भागीदारी होगी। उन्होंने अपने उत्तराखंड दौरे में ग्राउंड जीरो पर समितियों के कार्यों की सराहना की और कहा कि राज्य में सहकारिता का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है।

सम्मेलन के द्वितीय सत्र में उत्तराखंड रेशम फेडरेशन, राज्य सहकारी संघ, प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन,

मत्स्य एवं डेयरी फेडरेशन द्वारा अपने-अपने कार्यों और योजनाओं पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।

कार्यक्रम का मंच संचालन प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के प्रबंध निदेशक  मंगला त्रिपाठी द्वारा किया गया।

उनके द्वारा सहकारिता विभाग के 25 वर्षों की यात्रा पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया,

जिसमें उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से अब तक के सभी सहकारिता मंत्री, सचिव और निबंधकों के विकास कार्यों को याद किया गया।

वरिष्ठ सहकार बंधुओं को सम्मान सम्मेलन में उमेश त्रिपाठी, सुरेंद्र सिंह पनियाला,  मातवर सिंह रावत, महावीर प्रसाद कुकरेती एवं मरणोपरांत हयात सिंह म्हारा को “सहकारिता सम्मान” से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन जन-जन तक पहुंच रहा है।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव, हर किसान, हर महिला समूह सहकारिता से जुड़े, ताकि “सहकारिता से समृद्धि” का सपना साकार हो सके।

सहकारिता सम्मेलन में प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के वर्तमान अध्यक्ष रामकृष्ण मेहरोत्रा,

पूर्व अध्यक्ष रेशम फेडरेशन चौधरी अजीत सिंह, प्रदीप चौधरी, प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के उपाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट,

मनोज सामंत, गोपाल बोरा, सार्थक त्रिपाठी, सत्येंद्र सिंह बिष्ट, अमित शाह, नरेंद्र सिंह रावत, सुभाष रमोला,

सहकारिता विभाग के अधिकारी अपर निबंधक ईरा उप्रेती,  आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक  नीरज बेलवाल,

राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक प्रदीप मेहरोत्रा, उप निबंधक रमिंद्री मंदरवाल,

सहायक निबंधक (मुख्यालय)  राजेश चौहान सहित अन्य सभी जनपदों से उपस्थित जिला सहायक निबंधक, सचिव,

महाप्रबंधक, अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं सहकारिता से जुड़े व्यक्ति उपस्थित रहे।

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