सोशल मीडिया पर वायरल खबर और वीडियो की सत्यता की जांच में चूक को लेकर उठे सवाल, पत्रकारिता में फैक्ट चेकिंग की अहमियत फिर चर्चा में
नई दिल्ली 20 अक्टूबर 2026।
गायिका नेहा राठौर ने चैनल पर गलत खबर चलाई जाने के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज की।
नेहा ने फोन पर काफी देर तक वी पी रजनीश आहूजा से बात करते हुए अपना विरोध दर्ज किया तो वहीं कुछ समय बाद उन्होंने फ़ोन काट दिया।
गायिका नेहा राठौर से जुड़ी कथित गलत खबर और वीडियो के प्रसारण को लेकर मीडिया जगत में चर्चा तेज हो गई है।
वही लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ ने अपनी फेसबुक पेज पर कहां है की ABP के माफी मांग लेने से मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का कृत किया गया है वह माफी लायक नहीं है।
वहीं, सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी के अनुसार, इस मामले में ABP न्यूज़ के डिजिटल विभाग से जुड़े तीन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
इनमें एक महिला पत्रकार भी शामिल बताई जा रही हैं। हालांकि, इस कार्रवाई और इसके कारणों की आधिकारिक पुष्टि के लिए संबंधित संस्थान का पक्ष सामने आना आवश्यक है।
वीडियो प्रकाशित करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल-
सोशल मीडिया पर वायरल दावे के मुताबिक, मामले की आंतरिक जांच के दौरान डिजिटल वीडियो प्रकाशित करने की प्रक्रिया में लापरवाही सामने आई।
बताया जा रहा है कि वीडियो की सत्यता की पर्याप्त जांच किए बिना उसे प्रकाशित कर दिया गया था।
इसके बाद प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी की जांच कराई।
वायरल जानकारी में डिजिटल विभाग के वीडियो प्रमुख, शिफ्ट इंचार्ज और यूट्यूब शॉर्ट्स शिफ्ट इंचार्ज की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
दावा किया जा रहा है कि वीडियो को प्रकाशित करने से पहले उसकी तथ्यात्मक पुष्टि और क्रॉस-चेकिंग की प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया गया।
फैक्ट चेकिंग में चूक को बताया जा रहा कार्रवाई का आधार-
वायरल दावे में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रसारित एक पोस्ट और वीडियो को सही मानकर खबर प्रकाशित कर दी गई।
आरोप है कि संबंधित सामग्री की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई और न ही पर्याप्त तथ्य-जांच की गई।
इसके बाद वीडियो प्रकाशन से जुड़े वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में आई।
हालांकि, इस मामले में किस कर्मचारी की क्या भूमिका रही और प्रबंधन ने किन आधारों पर कार्रवाई की, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
मीडिया संस्थानों के लिए बड़ा सबक –
यह मामला डिजिटल पत्रकारिता में तेजी से खबर प्रकाशित करने की होड़ के बीच तथ्य-जांच की आवश्यकता को फिर रेखांकित करता है।
सोशल मीडिया पर वायरल किसी पोस्ट, वीडियो या दावे को बिना पुष्टि के खबर के रूप में प्रकाशित करना संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है,
और मीडिया संस्थान की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर सकता है।
पत्रकारिता के मानकों के अनुसार, किसी भी संवेदनशील खबर को प्रकाशित करने से पहले उसके मूल स्रोत की पहचान,
संबंधित पक्ष का पक्ष, वीडियो की प्रामाणिकता और उपलब्ध तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
नोट: तीन कर्मचारियों की नौकरी समाप्त किए जाने और आंतरिक जांच में उन्हें दोषी पाए जाने,
संबंधी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं होने के कारण इन्हें अपुष्ट जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।