नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एनईईटी -यूजी पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा 21 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य और न्याय की लड़ाई के लिए है।
जंतर-मंतर पर विभिन्न मांगों को लेकर जारी भूख हड़ताल के बीच जेएनयू की पीएचडी शोधार्थी और उत्तराखंड निवासी नेहा बोरा की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि नेहा पिछले 20 दिनों से केवल पानी के सहारे अनशन कर रही हैं।
आंदोलनकारियों के अनुसार, चिकित्सक डॉ. अंजलि छाबड़िया ने जंतर-मंतर पहुंचकर नेहा के स्वास्थ्य की जांच की।
जांच के बाद उन्होंने बताया कि नेहा की शारीरिक क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है।
उनका ब्लड शुगर स्तर काफी नीचे है और लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण संक्रमण सहित अन्य गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा बढ़ गया है।
डॉक्टर ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो उनकी हालत और गंभीर हो सकती है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर केवल नेहा बोरा ही नहीं, बल्कि 25 से 30 अन्य लोग भी विभिन्न मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा, छात्रों के भविष्य और व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने से जुड़े मुद्दों को उठाना है।
25 वर्षीय नेहा बोरा जेएनयू में पीएचडी की छात्रा हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उज्ज्वल शैक्षणिक भविष्य होने के बावजूद उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में अनशन का रास्ता चुना है।
फिलहाल प्रशासन या संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं, आंदोलनकारी सरकार से वार्ता कर मांगों के समाधान की अपील कर रहे हैं।
नोट: इस खबर में स्वास्थ्य संबंधी दावे आंदोलनकारियों और डॉक्टर के कथित बयान पर आधारित हैं।