भारत अब समय निर्धारण और उसके प्रसार के लिए स्वदेशी तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल का उद्देश्य पूरे देश में भारतीय मानक समय (IST) को एक समान,
सटीक और सुरक्षित संदर्भ के रूप में स्थापित करना है।
इस दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने व्हाइट रैबिट तकनीक पर आधारित समय प्रसार नेटवर्क का प्रदर्शन किया है।
बेंगलुरु में शुरू हुआ स्वदेशी तकनीक का प्रदर्शन
16 जुलाई 2026 को बेंगलुरु स्थित क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला में व्हाइट रैबिट तकनीक आधारित भारतीय मानक समय प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क शुरू किया गया।
इस तकनीकी पहल को उपभोक्ता मामले विभाग, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मिलकर विकसित किया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय मानक समय को सुरक्षित और अत्यधिक सटीक तरीके से विभिन्न संस्थानों और महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों तक पहुंचाना है।
इससे समय के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।
क्या है व्हाइट रैबिट तकनीक?
व्हाइट रैबिट एक उच्च-सटीकता वाली समय समन्वय तकनीक है, जो नेटवर्क से जुड़े उपकरणों के बीच समय का बेहद सटीक तालमेल स्थापित करने में मदद करती है।
इसका इस्तेमाल उन प्रणालियों में उपयोगी है, जहां कुछ माइक्रोसेकंड या उससे भी कम समय का अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस तकनीक के जरिए भारतीय मानक समय को बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली ग्रिड, परिवहन और डिजिटल प्रशासन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं तक पहुंचाने की क्षमता विकसित की जा रही है।
2026 के नए नियमों से क्या बदलेगा?
केंद्र सरकार ने 27 अगस्त 2026 को लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) नियम, 2026 अधिसूचित किए।
इन नियमों को राजपत्र में 29 अगस्त को प्रकाशित किया गया। नियमों के प्रावधानों के अनुसार, इनके लागू होने से पहले 180 दिनों की तैयारी अवधि निर्धारित की गई है।
इसका उद्देश्य सरकारी विभागों, व्यवसायों और संबंधित संस्थानों को अपनी प्रणालियों में जरूरी तकनीकी बदलाव करने का समय देना है।
इन नियमों का लक्ष्य कानूनी, प्रशासनिक, वाणिज्यिक और अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए भारतीय मानक समय को साझा संदर्भ बनाना है।
आम लोगों और देश की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा?
इस पहल से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समय का बेहतर समन्वय संभव होगा:
बैंकिंग और डिजिटल भुगतान: लेनदेन के समय का सटीक रिकॉर्ड रखने में मदद।
– रेलवे और परिवहन: विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल।
– दूरसंचार:नेटवर्क के समय समन्वय में सुधार।
– बिजली क्षेत्र:पावर ग्रिड की निगरानी और संचालन में सटीकता।
– डिजिटल सुरक्षा:बाहरी समय स्रोतों पर निर्भरता कम होने से महत्वपूर्ण प्रणालियों की मजबूती बढ़ाने में मदद।
पहले से लागू है भारतीय मानक समय
भारत में भारतीय मानक समय पहले से लागू है और इसे सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला बनाए रखती है।
नई पहल का उद्देश्य कोई नया समय क्षेत्र बनाना नहीं, बल्कि देशभर में समय को अधिक विश्वसनीय,
सुरक्षित और स्वदेशी तकनीकी ढांचे के माध्यम से उपलब्ध कराना है।
इसमें भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली नाविक (NavIC) सहित अन्य अनुमोदित भारतीय समय स्रोतों की भी भूमिका हो सकती है।
-निष्कर्ष: ‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इसके सफल कार्यान्वयन से देश की डिजिटल और महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं में सटीक समय समन्वय को मजबूती मिलने की उम्मीद है।