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रोज प्राणायाम करना स्वस्थ शरीर की कुंजी

“प्राणायाम” देहरादून – प्राणायाम से पूर्व कम से कम तीन बार ‘ओ३म्’ का लम्बा उच्चारण करना, प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए गायत्री, महामृत्युंजय या अन्य वैदिक मंत्रों का विधिपूर्वक उच्चारण या जप करना आध्यात्मिक दृष्टि से लाभप्रद है। प्राणायाम करते समय मुख, आँख, नाक आदि अंगों पर किसी प्रकार तनाव न लाकर सहजावस्था में…

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अनुलोम-विलोम प्राणायाम कर कटें रोग अनेक

अनुलोम-विलोम   देहरादून – अक्सर हम देखते हैं कि मस्तिष्क की प्रभाविता का तारतम्य प्रत्येक नासाछिद्र के श्वसन चक्र पर भी निर्भर करता है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार यह तारतम्य सिम्पथैटिक एवं पैरासिम्पथैटिक तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित होता है। यौगिक विज्ञान के सिद्धान्त “नाडी द्वारा मस्तिष्क के दोनों भागों का प्रयोग” के आधार पर यह…

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योग गुरु रामदेव ने बताया प्राणायाम के रहस्य

“प्राण जीवनीय शक्ति” देहरादून – जिस प्रकार ब्रह्माण्ड में अनेक शक्ति-क्षेत्र तथा बल होते हैं उसी प्रकार हमारे शरीर में भी प्राणशक्ति होती है जो बाहा क्षेत्र से हमारे श्वास -प्रश्वास से जुड़ी होती है। यदि किसी भी प्रकार का असन्तुलन या रिसाव इस प्राणशक्ति का होता है तो व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं। अतः प्राण…

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नियमित प्राणायाम करने से यह लाभ होते है

“कपालभाति प्राणायाम” देहरादून – कपालभाति प्राणायाम में सामान्यरूपेण अन्तःश्वसन (सामान्य साँस लेना) तथा यत्नपूर्वक प्रश्वास अर्थात् प्रयासपूर्वक बहिःश्वसन (जबरन साँस छोड़ना) कराया जाता है। बलपूर्वक प्रश्वास की प्रकिया में महाप्राचीरा पेशी (डायफ़्राम) व औरिक (पेट) पेशियों में संकुचन व अकुंचन क्रिया होती है जिसक फलस्वरूप उदरस्थ विभिन्न अवयवों (जैसे कि आमाशय, अग्न्याशय (अग्न्याशय) कपालभाति प्राणायाम…

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प्राणायाम करने से मिलेंगे यह लाभ

देहरादून – श्वसन संस्थान का प्रमुख कार्य शरीर की कोशिकाओं के लिए आक्सीजन की पूर्ति करना तथा कार्बन डाइऑक्साइड को निष्कासित करना है, किन्तु यहां तथ्य भी अवलोकनीय है कि कार्बन डाइऑक्साइड की एक नियत मात्रा रक्त में रहना आवश्यक है। श्वसन संस्थान में श्वसन क्रिया को निम्नलिखित  शारीरिक अंगों का महत्वपूर्ण योगदान है। मुखगुहा,….

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यौगिक क्रियाओं का यांत्रिकीय विश्लेषण

  श्वसन क्रिया देहरादून – श्वसन क्रिया हमारे शरीर में दो स्तर पर होती है। एक रक्त कोशिकाओं के स्तर  पर. दो ऊतक कोशिकाओं के स्तर पर । श्वास लेने पर हम दोनों ही स्तर को श्वसन क्रिया को सम्पादित करते हैं। प्राणायाम में हम एक क्रमबद्ध तरीके श्वास-प्रश्वास को संतुलित रूप में सम्पादित करते…

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पेट से श्वसन की मान्यता अवैज्ञानिक

देहरादून – परमात्मा या प्रकृति ने मानव-शरीर की संरचना कुछ इस प्रकार की है कि मनुष्य की श्वास नली 24 घंटे खुली रहती है। एपिग्लॉटिस नाम का एक कार्टिलेज होता है। जब हम भोजन करते हैं तो यह आहार (खाद्य पदार्थ) के अन्दर प्रवेश करते समय ढक्कन की तरह श्वास नली को बन्द कर देता…

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प्राणरूपी माता से भी हमें नवजन्म मिलता

देहरादून – प्राणायाम का अनुभूत सत्य 3 वर्ष की आयु से बच्चे प्राणायाम एवं सूक्ष्म व्यायाम कर सकते हैं एवं वृद्ध पुरुष भी अन्तिम श्वास तक प्राणायाम अवश्य करें। बच्चों की आसनों का अभ्यास 5 वर्ष की आयु से प्रारंभ करना चाहिए। 5 से 10 वर्ष तक के बच्चों को भस्त्रिका । मिनट, कपालभाति 5…

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पहचानें इन दोनों में कौन है योगगुरु रामदेव असली

दिल्ली –  योगगुरु स्वामी रामदेव  पहले भारतीय संन्यासी जिनकी बनी मोम की प्रतिकृति, जिसका   अनावरण विश्व प्रसिद्ध मैडम तुसाद न्यूयार्क ने दिल्ली में किया गया। यह भारतीय संस्कृति, संन्यास और सनातन योग परम्परा के वैश्विक प्रभाव की अत्यंत महत्वपूर्ण मान्यता और प्रतिष्ठा का परिचायक है।कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने कहा कि मैडम तुसाद, न्यूयॉर्क में…

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