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Campaign:-खाद्य संरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने हरित चारधाम यात्रा थीम पर शुरू किया अभियान 

देहरादून 21 अप्रैल 2026।

चारधाम यात्रा मार्ग के होटल – ढाबों में इस बार तीर्थयात्रियों को स्वच्छ और शुद्ध भोजन मिलेगा,

इसके लिए खाद्य संरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने यात्रा मार्ग पर क्विक रिस्पांस टीमों और मोबाइल फूड सेफ्टी वैन की तैनाती की है।

साथ ही विभाग ने यात्रा मार्ग के होटल- ढाबों और खाद्य कारोबारियों के साथ व्यापक स्तर संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरु किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चारधाम यात्रा को हरित यात्रा की थीम पर, संचालित करने पर जोर दे रहे हैं।

इसी क्रम में खाद्य संरक्षा औषधि प्रशासन विभाग, यात्रा मार्ग के प्रमुख शहरों में होटल और खाद्य कारोबारियों के साथ प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित कर रहा है।

विभाग ने चारधाम मार्ग पर शुद्ध और ताजा भोजन उपलब्ध कराने के लिए रोटेशन के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात किए हैं।

साथ ही यात्रा मार्ग पर खाद्य पदार्थों की जांच और जन जागरुकता के लिए मोबाइल फूड सेफ्टी वैन और शिकायत रिस्तारण के लिए क्विक रिस्पांस टीम भी तैनात की गई है।

विभाग ने शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर -18001804246 भी जारी किया है।

आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन सचिन कुर्वे के निर्देश पर विभाग यात्रा मार्ग के होटल, ढाबा संचालकों के साथ मीटिंग कर ग्रीन यात्रा,

स्वच्छता और मिलावट रहित भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण दे रहा है।

उपायुक्त मुख्यालय गणेश कंडवाल ने बताया कि आयुक्त के दिशानिर्देशों के क्रम में अब तक उत्तरकाशी, श्रीनगर ,

देवप्रयाग, तीनधारा, चंबा, घनसाली, रुद्रप्रयाग, घट्टूगाड़ में 250 से अधिक होटल कारोबारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि इन कार्यशालाओं में कारोबारियों से अपने भोजन में तेल, नमक और चीनी का उपयोग कम करने की अपील की जा रही है।

इससे खासकर मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित यात्रियों को सुविधा रहेगी।

साथ ही ईट राइट अभियान के क्रम में होटलों को खाद्य तेल को तीन बार से अधिक इस्तेमाल करने के बजाय इसे बायोफ्यूल बनाने के लिए उपलब्ध कराने के लिए कहा जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी  ने कहा कि चारधाम यात्रा में देश विदेश के लाखों यात्री उत्तराखंड पहुंचते हैं।

हमारा प्रयास है कि ना सिर्फ तीर्थ यात्रियों को शुद्ध भोजन और स्वच्छ वातावरण मिले,

बल्कि यात्रा के चलते हमारे पवित्र तीर्थस्थलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक की समस्या भी पैदा न हो,

हम सिंगल यूज प्लास्टिक का रिड्यूज, रियूज और रिसाइकिल के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं।

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